रुद्रप्रयाग, बृजेश भट्ट। केदारनाथ धाम के लिए ऊर्जा निगम की ओर से विछाई जा रही भूमिगत विद्युत लाइन पर वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। वन विभाग ने ऊर्जा निगम को बिना स्वीकृति के कार्य न करने की हिदायत दी है। वहीं, ऊर्जा निगम भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार कर वन विभाग को सौंपने की तैयारी कर रहा है। हैरत देखिए कि वन विभाग की नींद तब खुली, जब दस किमी से अधिक भूमिगत लाइन बिछाई जा चुकी है और अब मात्र दो किमी बिछनी ही शेष है।

2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। सरकार ने भी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी। लेकिन, कार्य शुरू होने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद अचानक वन विभाग ने निर्माण कार्य में अड़ंगा डाल दिया है। जबकि, इस अवधि में 12.5 किमी लंबी लाइन में से दस किमी से अधिक लाइन बिछाई जा चुकी है। वन विभाग ने प्रतिबंधित वन क्षेत्र में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही कार्य शुरू करने को कहा है। विभाग का यह भी कहना है कि बर्फ पिघलने के बाद बिछाई गई लाइन की जांच की जाएगी। इस दौरान यदि पाया गया कि सेंचुरी क्षेत्र में बिना अनुमति के कार्य हुआ है तो ऊर्जा निगम के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 

विदित हो कि धाम में प्रतिवर्ष बर्फबारी के चलते विद्युत लाइनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस बार भी पिछले डेढ़ माह से केदारनाथ में विद्युत पोल टूटे हुए हैं और लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इसका असर धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों पर भी पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए केदारनाथ आपदा के बाद धाम को सुरक्षित एवं संसाधन संपन्न बनाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए केंद्र सरकार से एसपीएआर (स्पेशल प्रोजेक्ट असिस्टेंस रिकंस्ट्रक्शन) के तहत सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 21 करोड़ की लागत से 11 केवी विद्युत लाइन बिछाने की स्वीकृति मिली। मई 2016 में लाइन के लिए सर्वे कार्य पूर्ण हुआ और इसके आधार पर भूमिगत विद्युत लाइन बिछाने का नक्शा तैयार किया गया। सितंबर 2018 में निगम की ओर से टेंडर प्रक्रिया जारी की गई और फिर लाइन बिछाने का जिम्मा जम्मू-कश्मीर की कंपनी पीर पंजाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लि. को सौंप दिया गया। 

दीपक सैनी (अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम, रुद्रप्रयाग) का कहना है कि सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.5 किमी लंबी भूमिगत विद्युत लाइन बिछाई जानी है। 10.5 किमी लाइन बिछाई जा चुकी है। वन विभाग ने भूमि स्थानांतरण के बाद कार्य करने को कहा है। इस संबंध में पत्रावली तैयार कर वन विभाग को सौंपी जा रही है।

अमित कंवर (उप वन संरक्षक, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग) का कहना है कि सोनप्रयाग से केदारनाथ तक जिस क्षेत्र में भूमिगत विद्युत लाइन बिछाई जा रही है, वह प्रतिबंधित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। निगम से इस संबंध में भूमि स्थानांतरण के बाद ही कार्य करने को कहा गया है। लाइन की जांच की जाएगी और यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में कार्य होना पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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Posted By: Sunil Negi

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