संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसी क्रम में पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में गुरुवार देर शाम केदारपुरी के रक्षक भैरवनाथ की पूजा संपन्न हुई। वहीं, बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली शुक्रवार सुबह आठ बजे अपने पहले पड़ाव गौरीकुंड के लिए रवाना होगी। 15 मई को डोली केदारनाथ धाम पहुंच जाएगी। धाम के कपाट 17 मई को सुबह पांच बजे खोले जाएंगे। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार डोली पैदल के बजाय रथ से जाएगी। डोली के साथ केदारनाथ जाने वाले सभी कर्मचारियों का टीकाकरण व सैंपलिंग की जा चुकी है।

उपजिलाधिकारी रविंद्र वर्मा ने बताया कि परंपरा के अनुसार ऊखीमठ से गौरीकुंड तक उन सभी स्थानों पर बाबा को भोग लगाया जाएगा, जहां डोली यात्रा श्रद्धालुओं को दर्शन देने अल्प विश्राम व रात्रि विश्राम करती थी। बताया कि कोरोना गाइडलाइन के अनुसार ओंकारेश्वर मंदिर में 50 मीटर व डोली के गुजरने वाले स्थानों पर 20 मीट के दायरे में किसी का भी प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। बताया कि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के 14 अधिकारी-कर्मचारियों, 14 हक-हकूकधारियों व आठ तीर्थ पुरोहितों के अलावा कुछ सेवकों को केदारनाथ जाने की अनुमति दी गई है। 

मक्कूमठ से पैदल ही रवाना होगी बाबा तुंगनाथ की उत्सव डोली

पंचकेदार में शामिल तृतीय केदार बाबा तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ से शुक्रवार को पैदल ही तुंगनाथ के लिए रवाना होगी। गुरुवार को मक्कूमठ में प्रशासन, तीर्थ पुरोहित, जनप्रतिनिधि व हक-हकूकधारियों की बैठक में यह जानकारी दी गई। बताया गया कि 14 व 15 मई को उत्सव डोली भूतनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास करेगी। यहां बाबा को नए अनाज का भोग लगाया जाएगा। डोली 17 मई की सुबह तुंगनाथ पहुंचेगी। इसी दिन शुभ लग्न में धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे। 

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