पिथौरागढ़, [जेएनएन]: आपकी राय-हमारा बजट कार्यक्रम के तहत जनसंवाद करने बैठे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष महिलाओं ने जमकर अपने मन की बात की। बोलीं-पहाड़ पर घर तक हम लोगों के सही नहीं हैं। लोन लेने जाओ तो कह दिया जाता है कि जमीन नाम नहीं है, इसलिए नहीं मिलेगा। हम क्या करें...। यह सुन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अपना दर्द नहीं रोक सके। बोले, पहाड़ पर बड़ी दिक्कत है यह...मेरा और प्रकाश पंत के मकान भी रजिस्ट्री नहीं है। गोल खाते की इस भूमि की नए सिरे से बंदोबस्त की जरूरत है। इस पर हमारी सरकार तेजी से विचार कर रही है।

मुख्यमंत्री रावत सीमांत में आयोजित होने वाले भव्य वसंतोत्सव के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सोमवार को यहां पहुंचे। वंसतोत्सव से पहले उन्होंने पुलिस लाइन में महिला समूहों के बीच आपकी राय-हमारा बजट कार्यक्रम में भाग लिया और सीधा संवाद किया। दूर-दराज व सीमांत के गांवों से आईं महिलाओं ने सीएम से खुलकर बात की व सुझाव रखे। 

महिलाओं ने कहा कि सबसे पहले भूमि में महिलाओं की हिस्सेदारी तय की जाए। पहाड़ पर गांवों की जमीन का दाखिलखारिज पुरु षों के नाम होता है। दूसरी तरफ सारी खेतीबाड़ी महिलाओं को संभालनी पड़ती है। सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं के लिए जब महिलाएं बैंकों में जाती हैं तो बैंक उनके नाम जमीन नहीं होने की बात कह ऋण देने से मना कर देते हैं।

गौड़ियागांव स्वायत्त्त समिति की मंजू बिष्ट ने कहा कि उनके समूह द्वारा दुग्ध उत्पादन किया जा रहा है। महिलाएं प्रतिदिन 250 लीटर दूध बेच रही हैं। दुर्भाग्य है कि उनके पास गौशाला तक नहीं हैं। उन्होंने सीएम से सीधे सभी महिलाओं को गौशाला उपलब्ध कराने के सुझाव दिए। जिसे सीएम ने स्वीकार करते हुए सामूहिक गौशाला देने का आश्वासन दिया। 

इस तरह जिपं सदस्य लक्ष्मी भट्ट ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में काम करने वाली महिलाओं सम्मानित करने का सुझाव दिया, धारचूला से आई रेखा धामी ने कहा कि वह खुद वाहन चलाकर बरेली, हल्द्वानी जाती हैं। लेकिन जिले में महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए एक भी वाहन प्रशिक्षण संस्थान नहीं है। सीएम ने विचार करने का आश्वासन दिया। छात्राएं कंचन व गरिमा ने छात्राओं को भी दुर्गम क्षेत्रों में स्कूल को वाहन व्यवस्था व गांवों में करियर काउंसलिंग और डिजिटल लाइब्रेरी का सुझाव दिया। 

सीएम ने कहा कि पिथौरागढ़ व चमोली जिले भूकंपीय जोन होने से संवेदनशील हैं। इसे दृष्टिगत रखते हुए यहां कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। उन्होंने पहाड़ की महिलाओं को देश में सर्वाधिक साहसी बताया। 

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Posted By: Sunil Negi

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