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    कत्यूरी और चंद राजवंश का भी केंद्र रहा पिथौरागढ़

    By Edited By:
    Updated: Fri, 21 Aug 2015 10:36 PM (IST)

    ओपी अवस्थी, पिथौरागढ़ कत्यूरी शासक पिथौरा शाही के नाम पर नगर का नाम पिथौरागढ़ पड़ा है। 24 फरवरी 19

    ओपी अवस्थी, पिथौरागढ़

    कत्यूरी शासक पिथौरा शाही के नाम पर नगर का नाम पिथौरागढ़ पड़ा है। 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़ की 30 पट्टियां और अल्मोड़े की दो पट्टियों को मिलाकर पिथौरागढ़ जिले का गठन किया गया था। पिथौरागढ़ नगर को जिला मुख्यालय बनाया गया।

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    इतिहास : पिथौरागढ़ का 10वीं सदी से लेकर कालखंड का इतिहास महत्वपूर्ण है। 1815 ईसवी में ब्रिट्रिश हुकूमत ने इसे ब्रिट्रिश परगना ऑफ सोर एंड जौहार नाम दिया। कत्यूरी शासक पिथौरा शाही के यहां शासन करने के कारण इस नगर का नाम पिथौरागढ़ पड़ गया। नगर में ही शामिल रई, भाटकोट से 200 ईपू के मृदभांडों तथा नैनीपातल से ताम्र आकृतियों की प्राप्ति नगर की प्राचीनता का बोध कराती है। सिंगौली संधि के पश्चात यह क्षेत्र आजादी तक औपनिवेशिक शासकों के अधीन रहा। आजादी के बाद यह नगर भी अल्मोड़ा जिले के अंतर्गत आता था।

    पिथौरागढ़ नगर पर लंबे समय तक कत्यूरी शासकों का राज रहा। इस वंश के ही पिथौरा शाही यहां के शासक थे, जिन्हें प्रीतम देव, पृथ्वी शाही और राजा राय पिथौरा शाही के नाम से भी जाना जाता है। इनके द्वारा सोर नाम भी दिया गया, जिसे अब पिथौरागढ़ कहा जाता है। एक तुर्क का भी निर्माण कराया, जिसे कालांतर में पृथ्वीगढ़ के नाम से जाना जाता है। अनुमानत: 1330 से लेकर 1400 ई. के मध्य निर्मित इस स्थान पर अब राबाइंका स्थित है। कत्यूरी वंश के बिखर जाने के बाद यहां चंद वंश का शासन रहा। लंबे समय तक शासन करने के बाद वर्ष 1790 में राजा महेंद्र चंद गोरखाओं से पराजित हो गए। इसके बाद पिथौरागढ़ गोरखाओं के कब्जे में रहा। पिथौरा शाही के किले में गोरखा फौजों के रहने से इसे गोरख्या किला भी कहा जाता है। इसी किले से नगर का नाम पिथौरागढ़ पड़ा। नगर के मध्य स्थित इस किले को लंदन फोर्ट किले के नाम से भी जाना जाता है।

    अतीत में पिथौरागढ़ को सोर नाम से भी जाना जाता है। सोर का अर्थ सरोवर होता है। बताया जाता है कि सोरघाटी में सात सरोवर थे। इन सरोवरों का पानी धीरे-धीरे सूखता गया और यहां पर पठारी भूमि उबर आई। पठारी भूमि के कारण भी इसका नाम पिठौरागढ़ कहा जाने लगा। जिला बनने के बाद इसका नाम पिथौरागढ़ पड़ गया।

    नगर की जनसंख्या-

    2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या- 77000 (नगर से सटे क्षेत्रों को मिलाकर जनसंख्या करीब एक लाख के आसपास)

    नगर के प्रमुख स्थल-

    चंडाक, चटकेश्वर, कपिलेश्वर, रई गुफा, लंदन फोर्ट किला, मोस्टामानू मंदिर, नैनी सैनी हवाई पट्टी आदि।