उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल... हिंदू युवक को मुस्लिम समझ कब्र में दफना दिया शव
कोटद्वार में पुलिस की लापरवाही सामने आई है, जहाँ उन्होंने एक अज्ञात शव को मुस्लिम समझकर दफना दिया। 15 जून को मिले इस शव की पहचान बाद में मु ...और पढ़ें

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रोहित लखेड़ा, जागरण कोटद्वार (कोटद्वार)। जटिल से जटिल केसों की गुत्थी सुलझाने का जिस पुलिस पर जिम्मा होता है, एक युवक की मौत मामले में उसकी अपनी ही कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। स्वयं के विवेक, जांच पड़ताल के बजाय पंचों की राय पर ही युवक के शव को मुस्लिम समझ दफना दिया। जब स्वजन पहुंचे तो उसके हिंदू होने की बात सामने आई। शव के लिए स्वजन को डीएम दफ्तर तक की दौड़ लगानी पड़ी।
इसके बाद पुलिस ने कब्र से शव निकालकर स्वजन के सुपुर्द किया। पुलिस की यह कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। 15 जून की रात रोडवेज बस अड्डे पर पुलिस को एक शव बरामद हुआ था। मृतक की जेब से किसी भी तरह का दस्तावेज नहीं मिला। पुलिस की मानें तो मृतक की पहचान के लिए कोटद्वार क्षेत्र के साथ ही बिजनौर जिले में फोटो भिजवाई थी।
पहचान न होने पर 19 जून को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को दफना दिया। इधर, 24 जून को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के हर्षा पटी, निकट वाटर टैंक, शोरों निवासी योगेंद्र ने कोतवाली में पहुंचकर मृतक की शिनाख्त अपने भाई धर्मेंद्र (38) पुत्र रामधन के रूप की। इससे पुलिस असमंजस में आ गई, क्योंकि शव को मुस्लिम समझ दफना दिया गया था।
स्वजन की ओर से शव को सुपुर्द करने की मांग पर पुलिस ने जिलाधिकारी का आदेश लाने को कहा। स्वजन 25 जून को पौड़ी गए और वहां से अपर जिलाधिकारी का आदेश लेकर कोटद्वार पहुंचे। इसके बाद गुरुवार शाम पुलिस ने कब्रिस्तान में दफन किए शव को स्वजन के सुपुर्द कर दिया। मृतक के स्वजन के पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक के भाई योगेंद्र ने बताया कि पंचायतनामा की प्रक्रिया में पुलिस ने पांचों पंच मुस्लिम समाज के ही रखे, जिन्होंने उसकी शिनाख्त मुस्लिम युवक के रूप में की।
जिस दिन शव मिला, पंचायतनामा की कार्रवाई के दौरान पंचों की राय और युवक के शारीरिक परीक्षण के आधार पर उसके मुस्लिम समाज का प्रतीत हुआ, जिस कारण उसे कब्रिस्तान में दफना दिया गया था। - रमेश तनवार, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक, कोटद्वार
प्रक्रिया के तहत काम करती है पुलिस
देहरादून: अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए पुलिस प्रक्रिया के तहत काम करती है। 15 दिन पुरानी गुमशुदगी पता करती है। देहरादून शहर कोतवाल प्रदीप पंत का कहना है कि दो चीजें खासकर देखी जाती हैं, पहला शरीर पर किसी प्रकार का निशान और कोई चीज गुदी हुई हो। इसके आधार पर ही उसके धर्म का पता लगाने का प्रयास किया जाता है।
इसके लिए शव को 48 घंटे के लिए शवगृह में रखा जाता है। (जासं) छह जून से गायब था धर्मेंद्र योगेंद्र ने बताया कि उसका भाई धर्मेंद्र छह जून को अपनी बाइक लेकर घर से निकल गया था। वह काफी शराब पीता था और अक्सर घर से चला जाता था। काफी दिन तक जब वह वापस नहीं आया तो उन्होंने उसके दोस्तों से उसकी खोजबीन शुरू कर दी।
कोटद्वार में जब उसके एक परिचित से संपर्क किया तो पता चला कि सात जून को वह उसके पास आया था। उसके बाद उसका कहीं पता नहीं चला। इस कारण वे उसे ढूंढने कोटद्वार आए, जहां आकर उन्हें पता चला कि धर्मेंद्र की मौत हो गई है। बताया कि धर्मेंद्र अविवाहित था और खेती का कार्य करता था।
आठ जून को हुआ था चालान जिस धर्मेंद्र को पुलिस ने अज्ञात समझ दफना दिया था, आठ जून को पुलिस ने उसी का चालान करते हुए उसकी बाइक सीज की थी। आरोप लगाया था धर्मेंद्र शराब के नशे में बाइक चला रहा था।
सवाल यह है कि आखिर 15 जून तक धर्मेंद्र कहां रह रहा था? उसकी मौत के दौरान भरे गए पंचायतनामा में भी पुलिस ने अत्यधिक शराब के सेवन से मौत की आशंका जताई। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हुई।

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