पौड़ी, (दुगड्डा), जेएनएन। लॉकडाउन में अपने घर में रहकर नियमों का पालन कर रहे 76 वर्षीय मोहनलाल बुधवार सुबह के वक्त अपने घर के पास खेतों में टहलते हुए यादों को ताजा कर रहे थे। तभी उनकी जेब में रखे मोबाइल की घंटी बजी और उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ऐसी यादें ताज हुई जो उन्हें जिंदगीभर याद रहेगी। हेलो, नमस्कार, क्या मोहनलाल जी बात कर रहे हैं। जी हां, बोल रहा हूं। सामने से जवाब आया हम प्रधानमंत्री कार्यालय से बोल रहे हैं। पीएम आपसे बात करना चाह रहे हैं। नमस्कार, मोहनलाल जी कैसे हैं आप। यह आवाज बेहद जानी पहचानी थी, लेकिन मोहनलाल को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। तीन मिनट बातचीत का सिलसिला चला। पुरानी यादें ताजा हुई तो मोहनलाल के चेहरे पर चमक आ गई और यकीन हो गया कि मोदीजी की यही खूबी उन्हें जननायक बनाती है।

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुगड्डा प्रखंड के ग्राम ऐता निवासी वरिष्ठ भाजपाई मोहनलाल बौंठियाल से दूरभाष पर वार्ता कर उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। बौंठियाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि जनसंघ से जुड़े अपने पुराने लोगों से बात के क्रम में ही वे उनसे बात कर रहे हैं। कहा कि ये समय संकट का है, इसलिए वे समाज के साथ ही स्वयं का भी पूरा ध्यान रखें। बौंठियाल ने बताया कि वार्ता के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ उन्होंने वर्ष 1998 में बदरीनाथ व गढ़वाल संसदीय सीट के प्रभारी रहते हुए वर्ष 2014 में श्रीनगर गढ़वाल की मुलाकातों को याद किया।

उन्होंने कहा कि यह किसी कार्यकर्ता के लिए बहुत बड़ा सम्मान है कि देश का प्रधानमंत्री स्वयं फोन कर उनका हालचाल पूछता है। बताते चलें कि 1944 में जन्मे मोहनलाल बौंठियाल 1958 में बाल स्वयं सेवक के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े व दो वर्ष बाद उन्होंने जनसंघ में प्रवेश किया। 1980 में भाजपा में शामिल हुए व तब से आज तक लगातार भाजपा कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में सेवाएं दे रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश शासनकाल में पार्टी ने उन्हें पर्वतीय विकास परिषद का सदस्य बनाया, जबकि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उन्हें वन विकास निगम व जलागम प्रबंध अनुश्रवण विकास परिषद का अध्यक्ष बनाया गया। पार्टी में रहते हुए बौंठियाल ने उत्तर प्रदेश शासनकाल में जिलाध्यक्ष व उत्तर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के दायित्व निभाए, जबकि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वे भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी, अनुशासन समिति के अध्यक्ष, गढ़वाल लोकसभा प्रभारी के साथ ही राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी रहे। मोहनलाल बौंठियाल ने विद्या भारती में रहकर सरस्वती शिशु मंदिरों की स्थापना में भी अहम योगदान दिया। साथ ही राम जन्म भूमि आंदोलन व उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।

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Edited By: Sunil Negi