पौड़ी, जेएनएन। गढ़वाल कमिश्नरी के पचास साल पूरे होने के मौके पर 'सुनैरु गढ़वाल' गोल्डन जुबली कार्यक्रम कई मायने में खास रहा। एक तरफ गढ़वाली भाषा में संबोधन, तो दूसरी तरफ गढ़वाली भाषा के पाठ्यक्रम का विमोचन। इस सब के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दलों के पारंपरिक वेशभूषा की प्रस्तुति ने आयोजन को खास बना दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गढ़वाली पाठ्यक्रम की न केवल सराहना की, बल्कि इसे तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञ, शिक्षकों को सम्मानित करने के साथ ही इसे जनपद में कक्षा एक से कक्षा पाचवीं तक के स्कूलों में संचालित करने के निर्देश भी दिए। 

मुख्यमंत्री ने प्रवासी उत्तराखंडवासियों से राज्य के विकास में सहभागी बनकर गांव लौटने का आह्वान भी किया। कमिश्नरी की गोल्डन जुबली को लेकर पौड़ी सांस्कृतिक रंगों से सराबोर है। यहां मुख्य कार्यक्रम कंडोलिया मैदान में आयोजित हो रहा है। शनिवार को राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सभास्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने शिलान्यास, लोकार्पण कार्यक्रम के अलावा विभिन्न विभागों और संस्थाओं के स्टॉलों का निरीक्षण भी किया। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल की पहल पर विषय विशेषज्ञों ने गढ़वाली भाषा में तैयार की गई कक्षावार पुस्तक का विमोचन भी किया। अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि रोजगार को लेकर कैबिनेट की बैठक में कई निर्णय लिए गए हैं। पौड़ी में इसकी शुरुआत कैबिनेट की बैठक से की गई। किसानों के लिए सरकार ब्याजमुक्त ऋण दे रही है। उन्होंने कहा कि पौड़ी के विकास के लिए सरकार जुटी है और आने वाले दिनों में इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। 
पलायन पर सीएम ने कहा कि इसका सर्वे कर लिया गया है, इस दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सीएम ने सभी से साल में एक दिन ग्रामोत्सव मनाने का आह्वान भी किया। इस मौके पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डा. धन सिंह रावत, गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत, लैंसडोन के विधायक महंत दलीप सिंह रावत, पौड़ी विधायक मुकेश कोली, नगर पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम, भाजपा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, राजेंद्र अणथ्वाल, भाजपा के जिला महामंत्री नीरज पांथरी, सुषमा रावत, सुमनलता ध्यानी, कमला रावत, जगत किशोर बड़थ्वाल, राजेंद्र रावत, नरेंद्र रावत, मातवर सिंह रावत, विवेक ममगाई आदि शामिल थे। संचालन गणेश खुगशाल गणी ने किया। 
15 करोड़ की योजनाओं का भी हुआ शिलान्यास 
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कंडोलिया मैदान में गोल्डन जुबली के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में 17 करोड़ 69 लाख 70 हजार की विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इसमें सड़क के अलावा नहरों का पुनर्रूद्धार भी शामिल है। इसके अलावा, सीएम ने आंचल दूध एटीएम वाहन को भी हरी झंडी देकर रवाना किया। बेहतर कार्य करने वाले भी हुए सम्मानित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कमिश्नरी की गोल्डन जुबली पर विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वालों को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 
सम्मानित होने वालों में जिलाधिकारी पौड़ी 
धीराज सिंह गब्र्याल, तहसीलदार गोपाल राम, संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अमिता चंदोला, सहायक निरीक्षक विपिन पाठक, ऋषिकेश के नगर आयुक्त चतर सिंह, डोईवाला के ईओ विजय प्रताप, गोपेश्वर के ईओ अनिल पंत, टिहरी के एएमए हिमांशु, ऊखीमठ के ईओ धर्मानंद शर्मा, डीडीओ वेदप्रकाश, उत्तरकाशी के डीएफओ संदीप, कोट के बीडीओ एसडी नौटियाल, डॉ. सुनील कुमार शामिल रहे। 
आयुक्त पुरुषोत्तम ने गढ़वाली में किया संबोधन 
कंडोलिया खेल मैदान में आयोजित गोल्डन जुबली कार्यक्रम में आयुक्त गढ़वाल डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने पूरा संबोधन गढ़वाली में दिया। इस पर सभी ने उनका तालियों से स्वागत किया। आयुक्त ने कहा कि पहाड़ की संस्कृति बहुत अच्छी है। इस भाषा की ताकत है। कहा मैं दक्षिण भारत का रहने वाला हूं, सोचा भी न था कि कभी गढ़वाली भाषा भी पाऊंगा, लेकिन यह सब स्नेह से ही मिला। 
बच्चों को पिलाया आंचल दूध 
मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के तहत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बच्चों को आंचल दूध भी पिलाया। कहा कि राज्य में एक लाख 65 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों को आंचल दूध मुहैया कराया जाएगा। इसका सभी ने तालियों से स्वागत किया। नंदा गौरा योजना के तहत वितरित किए चेक गोल्डन जुबली कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री ने नंदा गौरा योजना के तहत छह बालिकाओं को चेक भी वितरित किए। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए महिला समूहों को आय दोगुना करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए चेक भी वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान उन विषय विशेषज्ञ, शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी सम्मानित किया गया, जिनके अभिनव प्रयास से गढ़वाली भाषा का पाठ्यक्रम तैयार हो पाया। 
देव डोलिया भी रही आकर्षण 
गोल्डन जुबली के दौरान देव डोलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम के अलावा पारंपरिक वाद्य यंत्र भी काफी आकर्षण रहे। वाद्य यंत्रों की धुन पर लोग खूब झूमे। सैकड़ों की संख्या में आए दर्शकों ने आयोजन की सराहना की। मुख्यालय में आने वाले समय में भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम करने पर जोर दिया। 

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