उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में ऐसे चल रहा था सुगम-दुर्गम ट्रांसफर का खेल, हाई कोर्ट ने की थी टिप्पणी
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में सुगम-दुर्गम स्थानांतरण वर्गीकरण में धांधली का खुलासा हुआ है। हाई कोर्ट ने एक शिक्षक की याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की ...और पढ़ें

एक ही गांव के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय को सुगम-दुर्गम में किया वर्गीकृत। प्रतीकात्मक
किशोर जोशी, नैनीताल। राज्य में खासकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चहेते व जुगाड़ वाले शिक्षकों के मनमाफिक स्थानांतरण के लिए सुगम-दुर्गम के वर्गीकरण में प्रत्यावेदनों की झड़ी लगाकर ऐसा खेल खेला दशकों से दुर्गम में तैनात शिक्षक सुगम में नहीं आ सके जबकि सुगम में जमे शिक्षकों को कोई हिला नहीं सका।
हाई कोर्ट ने पहली सितंबर 2025 को एक जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए शिक्षक के स्थानांतरण मामले को जल्द निस्तारण के निर्देश देते हुए टिप्पणी की थी कि शून्य स्थानांतरण ऐसे कार्मिकों को प्रभावित कर सकता है जो कठिन क्षेत्रों में तैनात हैं और सुगम क्षेत्रों में जाना चाहते हैं। यह ऐसे कार्मिकों के लिए एक छिपा हुआ आशीर्वाद है, जो अब सुगम क्षेत्रों में तैनात हैं और दूरदराज के क्षेत्रों में ड्यूटी करने से बच रहे हैं।
कोर्ट ने शिक्षा सचिव की ओर से दिए गए इस तथ्य पर गौर किया कि स्थानांतरण अधिनियम को लागू करने में, विशेष रूप से सुगम और दुर्गम के वर्गीकरण के आधार पर स्थानांतरण में विभाग को उम्मीदवारों के अंकों की गणना में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अंकों की गणना के लिए भी मानव शक्ति लगाई जा रही है।
उत्तरकाशी के पुरोला के एक शिक्षक की हाई कोर्ट में दायर याचिका ने तो सुगम-दुर्गम के वर्गीकरण की धांधली पूरी तरह उजागर कर दी। जिसमें एक ही गांव में स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय को सुगम-दुर्गम में वर्गीकृत कर दिया गया।
कोर्ट ने कहा था कि स्थानांतरण सेवा की एक आवश्यकता है, इसलिए विशेष परिस्थितियों में सुगम और दुर्गम के वर्गीकरण के आधार के अलावा भी स्थानांतरण किया जा सकता है। कोर्ट का ऐसा कोई निर्देश नहीं है कि वर्तमान सत्र को शून्य स्थानांतरण सत्र घोषित किया जाए, लेकिन स्थानांतरण सुगम और दुर्गम के वर्गीकरण के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
ऐसे खुली सुगम-दुर्गम वर्गीकरण में धांधली की पोल
नैनीताल: हाई कोर्ट में उत्तरकाशी के पुरोला में तैनात शिक्षक भवानी प्रसाद बिल्जवाण का मामला सुनवाई में आया। इस मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने पूरे रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच करने के बाद स्वीकार किया कि पुरोला ब्लाक में सरकारी प्राथमिक स्कूल, कांताड़ी तथा उच्च प्राथमिक स्कूल, कांताड़ी एक ही जगह, एक ही गांव और एक ही ग्राम सभा में स्थित हैं, लेकिन उन्हें क्रमशः 'सुगम' और 'दुर्गम' के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया है। कोर्ट ने तब ऐसे वर्गीकरण के आधार पर किसी भी कर्मचारी के स्थानांतरण पर रोक लगाई थी।
2018 में विद्यालयों-कार्यालयों के कोटिकरण को तय किए थे मानक
नैनीताल: शिक्षा विभाग की ओर से वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत विद्यालयों के कोटिकरण के संबंध में मानकों के आधार पर विद्यालयों का सुगम-दुर्गम में वर्गीकरण की कार्रवाई शुरू की थी। इस संबंध में तत्कालीन शिक्षा सचिव डा. भूपिंदर कौर औलख की ओर से जिलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। प्रस्तावित मानकों में पर्वतीय क्षेत्र या मैदानी क्षेत्र में कार्यस्थल की पैदल दूरी, सड़क मार्ग की सुविधाएं, चिकित्सा सुविधाएं, बच्चों के लिए शिक्षण संस्थाएं, व्यावसायिक सेंटर या बाजार की सुविधाएं, समुद्र तल से ऊंचाई, रेलवे स्टेशन से कार्यस्थल की दूरी आदि की अलग-अलग श्रेणियों पर गुणांक तय किए थे।
प्रत्येक विभाग में जिला से ग्राम स्तर की तैनाती के लिए डीम की अध्यक्षता में गठित कमेटी विभाग की आवश्यकता के अनुसार सुगम-दुर्गम चिन्हीकरण मानकों के अनुसार करेगी। जिला, तहसील व ब्लाक मुख्यालय, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत क्षेत्र के कार्मिकों की तैनाती के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में सुगम-दुर्गम चिन्हीकरण करेगी। शासन व विभागाध्यक्ष स्तर पर तैनाती के लिए भी मानक तय थे। एक्ट के अनुसार सुगम से दुर्गम, दुर्गम से सुगम में अनिवार्य स्थानांतरण व अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण का प्रविधान है।
जिले के नौ जीआइसी अब दुर्गम श्रेणी में
नैनीताल: हाई कोर्ट भले ही सुगम-दुर्गम वर्गीकरण पर सवाल उठा चुका हो लेकिन जिले में शिक्षा विभाग ने नौ विद्यालयों को सुगम से दुर्गम श्रेणी में शामिल कर दिया। सीईओ की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को एडी माध्यमिक कार्यालय से निदेशालय को भेजा गया है, इसमें जीआइसी बानना, जीआइसी जंगलियागांव, जीआइसी ओखलढूंगा, जीआइसी पटवाडांगर, जीजीआइसी भीमताल, जीआइसी क्वारब, जीआइसी ढोकाने, जीआइसी जौरासी व जीआइसी भींड़ापानी। यह कालेज अब दुर्गम श्रेणी में आएंगे।

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