नैनीताल, [रमेश चंद्रा]: नए साल के स्वागत में चांद ने भी चार चांद लगाए। नववर्ष की पहली रात के स्वागत में चांद की चांदनी दुधिया रोशनी से खिल उठी। यह संयोग वर्ष के पहले सुपरमून के कारण बना। जिसने धरती को रात में जगमग कर दिया। पृथ्वी के बेहद करीब आ जाने पर चांद की रोशनी 28 फीसद अधिक बढ़ गई और चांद का आकार 14 प्रतिशत अधिक बड़ा नजर आया। चांद के चाहने वाले इस नजारे को कैमरे में कैद करने से नहीं चुके। 

धरती का एकमात्र उपग्रह चांद यूं तो पूरे वर्ष धरती के इर्द-गिर्द मंडराता रहता है। लेकिन साल में कुछ अवसर ऐसे भी आते हैं, जब वह पूरे यौवन पर नजर आता है। भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बंगलूरू के पूर्व वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक प्रो. आरसी कपूर के अनुसार सोमवार की रात चांद धरती की औसत दूरी से करीब तीस हजार किमी नजदीक आ पहुंचा। पृथ्वी से धरती की औसत दूरी 3.86 लाख किमी है और जब चांद सबसे दूर होता है तो यह दूरी चार लाख किमी से भी अधिक होती है।

गत दिवस चांद धरती की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी के 3.56 लाख किमी की दूरी पर आ पहुंचा। सोमवार रात साढ़े तीन बजे चांद धरती के सर्वाधिक करीब था। जिस कारण चांद की रंगत में निखार नजर आया और उसकी रोशनी से धरती भी चांदनी रात में खिल उठी। 

वैज्ञानिकों ने दिया पेरिजी मून नाम 

प्रो. कपूर के अनुसार यह वर्ष का पहला सुपरमून था। दुनिया में सुपरमून के चाहने वालों की कमी नहीं है, इसलिए बेसब्री से इसका इंतजार रहता है। जिस तरह भारतीय साहित्य में चांद के किस्से कहानियों की कमी नही है। उसी तरह दुनिया के देशों में चांद को कई नाम दे दिए गए हैं। इन नामों में सुपरमून के अलावा ब्लडमून व डायमंड मून, यलोमून व पिंकमून इत्यादि नाम शामिल हैं। नववर्ष की रात धरती के नजदीक आए इस सुपरमून को वैज्ञानिकों ने पेरिजी मून का नाम दिया है। सुंदरता के लिहाज से यह चांद वास्तव में बेहद दिलकश था।

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