हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : कोरोना काल की वजह से गौला बैराज की मरम्मत का काम अटक गया है। इसका कारण यह है कि बैराज की मरम्मत के लिए दो दिन तक जलसंस्थान को जलापूर्ति बंद करनी पड़ेगी। इस दौरान जलसंस्थान को टैंकरों से पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। कोरोना काल में टैंकरों से जलापूर्ति करने पर लोगों की भीड़ पानी लेने के लिए जुटेगी। जिससे कोराेना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। हालांकि बैराज मरम्मत के लिए मंगलवार को जलसंस्थान और सिंचाई विभाग के अफसराें के बीच मंथन होना है।

गौला बैराज की मरम्मत के लिए शासन ने सिंचाई विभाग की 4.90 करोड़ योजना को स्वीकृति दी थी। इसमें 3.30 करोड़ रुपये से सिविल वर्क और शेष धनराशि से मैकेनिकल वर्क किया जाना था। सिंचाई विभाग के अफसरों के मुताबिक करीब ढाई करोड़ रुपये के सिविल के काम पूरे हो चुके हैं। जबकि 80 लाख रुपये के काम होने शेष हैं। इस धनराशि से गौला बैराज के गेट नंबर एक की मरम्मत, गेट पर सिल बीम लगाना और डाउन स्ट्रीम में टूटे हुए पत्थरों की मरम्मत का काम किया जाना है। यह काम गौला नदी का जलस्तर कम होने पर ही हो पाते हैं। वर्तमान में नदी मेंं पानी काफी कम है।

 

जिस कारण यह समय बैराज मरम्मत के लिए काफी मुफीद था। गेट नंबर एक की मरम्मत के लिए जलसंस्थान की अनुमति जरूरी है। क्योंकि मरम्मत के काम के दौरान दाे दिन तक जलसंस्थान के फिल्टर प्लांट को पानी की सप्लाई बंद रखी जाएगी। इस समय में जलसंस्थान को ही गौला के पानी पर निर्भर दो लाख लोगों के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ेगी। वहीं कोरोना संक्रमण फैलने की वजह से सरकार ने कफ्यू लगाया हुआ है। पहले कोरोना कफ्यू 18 मई तक था।

 

अब सरकार ने इसे 25 तक बढ़ा दिया है। सिंचाई विभाग के अपर सहायक अभियंता मनोज तिवाड़ी ने बताया कि जलसंस्थान अफसरों ने कोरोना काल के दौरान पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराने लोगों की भीड़ जुटने और संक्रमण के फैलने के खतरे की आशंका जताई है। 18 मई को कफ्यू हटने पर बैराज मरम्मत को लेकर मंथन होना था। वहीं सरकार के कफ्यू की अवधि बढ़ाने से मरम्मत का काम लटकने के आसार खड़े हो रहे हैं। कुछ दिन बाद मानसून सत्र शुरू होने और गौला में पानी बढ़ने पर मरम्मत के काम नहीं हो पाएंगे। जिसके बाद साल अंत या अगले साल ही काम होना संभव होगा।

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Edited By: Skand Shukla