मनीष साह, गरमपानी। प्रदेश के लोगों को अब उच्च रक्तचाप, मधुमेह व कैंसर समेत अन्य जटिल बीमारियों के उपचार के लिए अब बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी होगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की महत्वाकांक्षी योजना से अब सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी लाभ मिल सकेगा। इसके लिए जल्द ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य (पीएचसी) व एएनएम केंद्रों में विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। खास बात यह है कि इसके लिए बकायदा प्रशिक्षण भी शुरू कर दिए गए हैं। योजना का मकसद प्रारंभिक अवस्था में ही बीमारी की पहचान कर मृत्यु दर को कम करना तथा बड़े अस्पतालों की भीड़ को भी कम करना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रक्तचाप, मधुमेह व अन्य गैर संचारी रोगों के प्राथमिक उपचार के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू करने जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के करीब 250 प्राथमिक स्वास्थ्य (पीएचसी) व 1848 एएनएम सब सेंटरों में विशेषज्ञ चिकित्सक व अन्य स्टाफ की तैनाती की जाएगी, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रोग की प्रारंभिक स्थिति का पता कर उपचार दिया जाएगा। सेहत में सुधार ना होने पर मरीज को निगरानी में रख हायर सेंटर भेजा जाएगा।

पीएचसी व एएनएम सेंटर्स में भी कैंसर जांच

शुरुआती चरण में कैंसर जैसे घातक रोगों की पहचान भी पीएचसी व एनएम सब सेंटर में की जाएगी। अधिक दिक्कत होने पर ही उसे हायर सेंटर रेफर किया जाएगा। जहां विशेषज्ञों की निगरानी में मरीज का उपचार होगा।

उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण को हिस्ट्रीशीट का सहारा

रक्तचाप व मधुमेह की शिकायतों में लगातार वृद्धि होने के कारण चिकित्सक अब इन रोगियों की दिनचर्या में भी बदलाव लाने की मुहिम भी चलाएंगे। परिवार की हिस्ट्री भी चेक की जाएगी। साथ ही संतुलित भोजन, योगा, धूम्रपान तथा नशे से दूर रहने के तौर-तरीके भी बताए जाएंगे, जिससे समाज भी जागरूक हो इन बीमारियों के कारणों से खुद को दूर करने को प्रेरित हो सकेगा।

एएनएम और आशाओं की बढ़ेगी भूमिका

लोगों को महत्वाकांक्षी योजना का लाभ दिलाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती तो होगी ही साथ ही पीएचसी व एएनएम सब सेंटर में तैनात आशा कार्यकर्ता व एएनएम भी मुख्य भूमिका में होंगे। इसके लिए बाकायदा एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

अंजली नौटियाल, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने बताया कि कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व एएनएम सब सेंटर को तैयार कर लिया गया है। योजना से काफी लाभ मिलेगा। गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों को शुरुआत में ही बेहतर उपचार में बड़ी मदद मिलेगी। पीएचसी को जांच आदि के लिए जरूरी संसाधनों से लैस किया जाएगा।

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