नैनीताल, रमेश चंद्रा : 21 जून का दिन इस बार अद्भुत होगा। योग दिवस के साथ ही वर्ष का सबसे बड़ा दिन और 87 साल बाद लग रहा वलयाकार सूर्यग्रहण इस दिन को अद्भुत बनाने जा रहा है। वलयाकार ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। इसमें भारत के भी कई स्थान शामिल होंगे। वलयाकार ग्रहण के दीदार के लिए सिर्फ 30 सेकंड मिलेंगे। इसके आने में भले ही अभी चार माह का समय शेष हो, लेकिन इसके परीक्षण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इससे पूर्व यह ग्रहण भारत में 21 अगस्त 1933 में हुआ था।

काफी पतला होगा इस बार का वलय

इस बार लगने वाले ग्रहण का वलय काफी पतला होगा, जो चंद सेकंड ही दिखाई देगा। ग्रहण का पाथ दक्षिण पूर्व यूरोप, एशिया का अधिकांश भाग, उत्तरी आस्ट्रेलिया से होकर गुजरेगा। भारत में उत्तर पश्चिमी राजस्थान, हरियाणा व उत्तराखंड के कुछ ही हिस्सों में वलयाकार ग्रहण देखने को मिलेगा। घरसाना, सूरतगढ़, एलनाबाद, सिरसा, मृदुलगढ़, लाडवां, दुहाना, कुरुक्षेत्र, पेहवा व यमुनानगर से वलयाकार ग्रहण का पाथ होगा। उत्तराखंड में देहरादून, नई टिहरी, मानसरोवर, अगस्त्यमुनि व जोशीमठ से वलयाकार ग्रहण देखा जा सकेगा। बाकि हिस्सों में आंशिक ग्रहण होगा। नैनीताल व हरिद्वार से 99 फीसदी सूर्य ग्रहण की चपेट में आएगा। 

खगोल विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का मौका

दुर्लभ वलयाकार ग्रहण को यादगार बनाने के लिए आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान विशेष तैयारियां करने जा रहा है। वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे के अनुसार खगोल विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह अच्छा मौका है। संस्थान इस मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित करेगा।

भारत पहुंचेंगे कई देशों के वैज्ञानिक

भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बैंगलुरू के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक प्रो.आरसी कपूर का कहना है कि इसका परीक्षण करने कई देशों के वैज्ञानिक व खगोल प्रेमी भारत पहुंचेंगे। वैज्ञानिक दृष्टिï से यह सूर्यग्रहण खास महत्व रखता है, जो सूर्य पर अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

ग्रहण के वक्त रखें आंखों का खयाल

नैनीताल: सूर्यग्रहण को सीधी आंखों से देखने की भूल कतई न करें। इसके अलावा बिना फिल्टर के कैमरे व दूरबीन से भी ग्रहण को न देखें। ग्रहण देखने के लिए सोलर एक्लिप्स चश्मों का सहारा लें। दूरबीन व कैमरे में उचित फिल्टर लगाकर ही ग्रहण को देखें।

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Posted By: Skand Shukla

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