हल्द्वानी के MBPG College में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए जरूरी खबर, इन तीन विषयों को मिली स्थायी मान्यता
एमबीपीजी कॉलेज, हल्द्वानी को एमए भूगोल, संस्कृत और एजुकेशन विषयों के लिए स्थायी मान्यता मिल गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय और राजभवन के अनुमोदन के बाद यह ...और पढ़ें

कुमाऊं विश्वविद्यालय से 10 वर्ष बाद तीन स्नातकोत्तर कोर्सों को दी पूर्ण संबद्धता. File Photo
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । एमबीपीजी कालेज को एमए में भूगोल, संस्कृत और एजुकेशन विषय संचालित करने के लिए स्थायी मान्यता मिल गई है। कुमाऊं विश्वविद्यालय की समिति के अनुमोदन पर राजभवन ने तीनों कोर्सों को चलाने के लिए पूर्ण संबद्धता प्रदान की दी है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में करीब 10 वर्ष का समय लग गया। लेकिन अब स्थायी मान्यता हो जाने से कोर्स चलाने के लिए हर साल अस्थायी संबद्धता लेने की लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। साथ ही कालेज पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ भी कम होगा।
दरअसल, प्रदेश के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी हल्द्वानी में दिसंबर 2014 में स्नातकोत्तर में भूगोल, संस्कृत और एजुकेशन पाठ्यक्रम को स्वीकृति मिली थी। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रविधान के अनुसार शुरुआती तीन वर्ष में किसी भी कोर्स की अस्थायी मान्यता दी जाती है।
सरकारी कालेजों में अस्थायी संबद्धता के लिए 12 हजार रुपये विश्वविद्यालय शुल्क और करीब 35 से 40 हजार रुपये पैनल प्रक्रिया में खर्च आ जाता है। इससे एक पाठ्यक्रम की एक वर्षीय मान्यता के लिए 50 हजार रुपये खर्च आता है। साथ ही कालेज के शिक्षकों भी मान्यता विस्तार के लिए काफी उलझन में रहते हैं।
एमबीपीजी कालेज प्रशासन तीन कोर्सों की स्थायी मान्यता के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहा था। साथ ही तीनों कोर्सों के लिए 1.50 लाख रुपये तक खर्च आता रहा था। लेकिन अब स्थायी मान्यता मिलने के बाद कोर्स संचालन की बाधाएं दूर हो गई हैं।
विश्वविद्यालय से पीजी भूगोल, संस्कृत और एजुकेशन की स्थायी मान्यता मिल गई है। अब हर साल मान्यता विस्तार कराने की लंबी प्रक्रिया नहीं करनी पड़ेगी। वहीं, संगीत विषय के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। - प्रो. एनएस बनकोटी, प्राचार्य

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