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हल्द्वानी, जेएनएन : हरियाली की सुरक्षा का दावा करने वाला वन विभाग पेड़ कटने के बाद जांच को लेकर दावे तो बड़े-बड़े करता है, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई करने से हमेशा बचता है। अगर काटा गया कुछ माल बरामद हुआ तो जांच पूरी होने का तो सवाल ही नहीं। अफसर हमेशा एक कमेटी बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाते हैं। ज्यादातर जांच एसडीओ स्तर के अधिकारी को मिलती है, जो महीने बीतने के बाद भी जंगल में घुसते तक नहीं हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। पेड़ कटने की घटनाओं में वनकर्मियों की मिलीभगत से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।

केस एक: कहां गए जू के तस्कर 
गौलापार जू में इस साल जून में तस्करों ने चार दर्जन से अधिक सागौन के पेड़ काट दिए थे। जू प्रशासन ने जमीन ट्रांसफर नहीं होने की बात कहकर मामला तराई पूर्वी वन प्रभाग की तरफ टाल दिया। गौला रेंज ने काटा हुआ माल बरामद किया था। बाद में जांच जू प्रशासन के पास ही पहुंची, लेकिन वह आज तक पता नहीं कर सका कि तस्कर कौन थे।

केस दो: टांडा जंगल में जड़ दफनाने वाले अब भी राज
टांडा जंगल में तीन माह पूर्व एक पिकअप पकड़े जाने पर डीएफओ ने 3600 हेक्टेयर जंगल में तीन टीमें बनाकर आठ दिन तक कांबिंग कराई थी। तब पता चला था कि कई जगह से पेड़ गायब हुए हैं। कहीं पर तो तस्करों ने गड्ढा खोदकर जड़ तक अंदर दफन कर दी थी। तब से मामले की जांच ही चल रही है। कार्रवाई करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई।

केस तीन: चंदन और खैर किसने काटे
रामनगर वन प्रभाग में शामिल फतेहपुर रेंज लगातार चर्चा में है। रेंज परिसर से दो बार चंदन का पेड़ गायब होने के साथ जंगल में खैर के पेड़ भी गायब हुए। रेंज परिसर में मौजूद वनकर्मी पर चंदन तस्करों द्वारा हमले के मामले को पुलिस भी संदिग्ध बता रही है। वन विभाग यहां हो चुकी घटनाओं का एक भी आरोपित नहीं पकड़ सका।

केस चार: पता होने के बावजूद नहीं पकड़े शिकारी
पिछले माह बेलबाबा के पीछे स्थित जंगल में दो सांभर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मौके से वन विभाग दो बाइक भी उठाकर लाई। गाड़ी मालिकों का पता होने के बावजूद वन विभाग शिकारियों का पता नहीं कर सका। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग की भूमिका संदिग्ध है।

दोषियों के खिलाफ जरूर होगी कार्रवाई 
आरके सिंह, डीएफओ तराई केंद्रीय ने बताया कि टांडा प्रकरण की रिपोर्ट मिल चुकी है। दोषियों के खिलाफ जरूर कार्रवाई होगी। सोमवार तक एक्शन लिया जाएगा। वहीं भूपाल सिंह कैड़ा, रेंजर जू ने बताया कि जमीन अभी जू के नाम ट्रांसफर नहीं हुई है। इसलिए सुरक्षा का जिम्मा गौला रेंज का है। 

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Posted By: Skand Shukla

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