हल्द्वानी,अभिषेक राज : गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण के बाद चीन के असर में नेपाल लगातार उकसाने वाली कार्रवाई कर रहा है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से लगती सीमा पर तीन बॉर्डर आउट पोस्ट बनाने के बाद अब उसने कालापानी और काठमांडू के बीच कॉरीडोर पर काम शुरू कर दिया है। यहीं से नेपाली सेना लिपुलेख और कालापानी पर नजर रखेगी। निर्माण के लिए शुक्रवार को हेलीकॉप्टर से विशेष दल सुदूर पश्चिम नेपाल के घांटीबगर में पहुंचा। यहां सेना की एक प्लाटून (45 सैनिक) भी तैनात होगी। उसी की निगरानी में निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा।

दार्चुला-तिंकर तक पहुंच होगी आसान

काठमांडू-महाकाली कॉरीडोर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत पिथौरागढ़ जिले से सटे नेपाल के दार्चुला-तिंकर तक सड़क निर्माण होगा। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इसकी कुल लंबाई 87 किलोमीटर होगी। इसे नेपाली सेना गश्त के साथ ही आपात स्थिति में वाहनों से आवाजाही के लिए भी उपयोग कर सकती है।

नेपाल ने 1200 नागरिकों को खलंगा भेजा

नेपाल के दार्चुला जिले के व्यास गांवपालिका वार्ड नंबर 1 में छांगरु और तिनकर गांवों के करीब 182 घर नेपाल, भारत, चीन से लगती सीमा पर बने हैं। यहां के सामरिक महत्व को देखते हुए नेपाल ने 1,200 स्थानीय लोगों को खलंगा में स्थानांतरित कर दिया है।

माइग्रेशन को मिलेगी नई राह

कॉरीडोर के बाद नेपाल के उच्च हिमालयी दो गांवों के लोगों को माइग्रेशन के लिए भारत की भूमि का प्रयोग नहीं करना होगा। उनकी आवाजाही आसान होगी। वह जिला मुख्यालय से सीधे जुड़ सकेंगे। अभी घाटीगांव के रास्ते खलंगा से टिंकर भंजंग की दूरी 134 किलोमीटर है। कॉरीडोर निर्माण से घाटीबाग से टिंकर की दूरी 87 किमी हो जाएगी।

सीमावर्ती गतिविधियों पर रहेगी नेपाल की सीधी नजर

नेपाली सेना के प्रवक्ता विज्ञान देव पांडेय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि कॉरीडोर निर्माण के बाद भारत के कैलास मानसरोवर मार्ग पर नेपाली सेना आसानी से नजर रख सकेगी। कालापानी और लिपुलेख में होने वाली सभी गतिविधियां यहीं से पता चल जाएंगी।

सीमा विवाद संवाद से दूर करेंगे

प्रदीप ज्ञवाली, विदेश मंत्री नेपाल (नेपाल विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के आधार पर) ने कहा है कि सीमा विवाद पर हम भारत से कूटनीतिक संवाद के लिए तैयार हैं। आपसी संवाद से हमें कोई आपत्ति नहीं। हमारी कोशिश सीमा पर तनाव दूर करना है।

ड्रेगल बर्दाश्त नहीं कर पा रहा भारत की तरक्की

बीएस रौतेला, मेजर जनरल (रिटायर्ड) ने बताया कि गर्बाधार-लिपुलेख सड़क निर्माण से भारत की पहुंच चीन सीमा तक हुई है। इसे ड्रेगन बर्दाश्त नहीं कर पा रहा। वह नेपाल को आगे कर माहौल बिगाडऩे की कोशिश कर रहा है। काठमांडू-महाकाली कॉरीडोर का निर्माण इसी में एक अहम कड़ी है।

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Posted By: Skand Shukla

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