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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

India-Nepal Border Dispute: नेपाल ने भारतीय सीमा से सटे जुल्लाघाट में बीओपी का किया उद्घाटन

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Sat, 23 May 2020 05:26 PM (IST)

भारत के कालापानी को अपना हिस्सा बताने के बाद नेपाल की नई करतूत सामने आई है। उच्च हिमालयी छांगरू के ...और पढ़ें

India-Nepal Border Dispute: नेपाल ने भारतीय सीमा से सटे जुल्लाघाट में बीओपी का किया उद्घाटन
India-Nepal Border Dispute: नेपाल ने भारतीय सीमा से सटे जुल्लाघाट में बीओपी का किया उद्घाटन

झूलाघाट/पिथौरागढ़, जेएनएन : भारत के कालापानी को अपना हिस्सा बताने के बाद नेपाल की नई करतूत सामने आई है। उच्च हिमालयी छांगरू  के बाद नेपाल सशस्त्र बल ने भारत सीमा से लगे जुल्लाघाट में बीओपी शुरू कर दी है। नेपाल सशस्त्र बल के पश्चिम नेपाल क्षेत्र के उप महानिरीक्षक हरिशंकर बूड़ाथौकी ने शनिवार को बाॅर्डर ऑफ पोस्ट यानी बीओपी का विधिवत उद्घाटन कर दिया।

भारत और नेपाल को जोडऩे वाले अंतरराष्ट्रीय झूलापुल के पास नेपाल सशस्त्र बल ने किराए के मकान में बीओपी चौकी को शुरू किया है। पश्चिम नेपाल के डीआइजी हरिशंकर बूड़ाथौकी ने चौकी उद्घाटन करने के दौरान 51 गुल्म (बटालियन) के सेनानी अमित सिंह भी मौजूद रहे। चौकी में अधिकारियों सहित 35 जवान तैनात रहेंगे। हालांकि वर्तमान में एक उप निरीक्षक, एक एएसआइ, दो हवलदार और छह जवान तैनात किए गए हैं। सूत्रों की मानें तो नेपाल की मंशा निकट भविष्य में बीओपी के लिए भूमि तलाश करने की मंशा है।

दो माह में दो बीओपी शुरू, तीसरी की तैयारी

कोरोना महामारी के चलते जारी लॉकडाउन के दौरान नेपाल ने सबसे पहले लाली के पास बीओपी चौकी खोल दी थी। अब भारतीय क्षेत्र झूलाघाट के सामने चौकी खुल चुकी है। अगले सप्ताह भारतीय क्षेत्र पंचेश्वर में महाकाली के पार अपने क्षेत्र में नेपाल बीओपी शुरू करने जा रहा है। बॉर्डर पर नेपाल की सक्रियता से दोनों तरफ के लोगों में सुगबुगाहट का दौर शुरू हो गया है।

2001 में भी हुई थी कालापानी में झंडा फहराने की कोशिश

गर्बाधार-लिपुलेख सड़क बनने के बाद नेपाल तिलमिला उठा है। नेपाल में कुछ गुमनाम संगठन अनावश्यक विवाद के प्रयास किए जा रहे हैं। दो दिन पूर्व एक गुमनाम विद्यार्थी संगठन के कुछ लोगोंं ने कालापानी को कूच किया, परंतु नेपाल के ही ग्रामीणों ने उन्हें मार्ग से लौटा दिया। इस तरह का प्रयास पूर्व में भी हुआ था। तब भी सीमा पर रहने वाले नेपाल के लोगों ने इसे तनाव बढ़ाने का प्रयास बताते उनका विरोध किया था। वर्ष 2001 में भी इस तरह का प्रयास किया गया। तब वर्तमान पंचायत राजमंत्री धन सिंह रावत के नेतृत्व में युवाओं ने कालापानी तक पद यात्रा कर झंडा फहराया था। उस समय नेपाल में माओवादी सक्रिय थे। इसी दौरान कालापानी, लिपुलेख को लेकर विवाद पैदा किया गया। सीमा पर तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया था। तब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने राष्ट्रीय सुरक्षा जन जागरण पद यात्रा निकाली थी। वर्तमान पंचायत राज मंत्री धन सिंह रावत उस समय अभाविप के  प्रदेश संगठन मंत्री थे । उनके नेतृत्व में अभाविप के 11 कार्यकर्ता उनके साथ कालापानी को गए थे।

जबरत विवाद पैदा करने की कोशिश : धन सिंह

उत्‍तराखंड के पंचायती राज व सहकारिता राज्‍य मंत्री डॉ: धन सिंह रावत का कहना है कि 2001 में नेपाल मेंं माओवाद काफी सक्रिय था। तब कुछ संगठन भारत विरोध की बात करते थे। भारत और नेपाल की पारंपरिक मित्रता अटूट है। इसे ध्यान में रखते हुए पद यात्रा निकाली गई थी। इस पद यात्रा का उच्च हिमालयी गांवों में जोरदार स्वागत किया गया। यह यात्रा सफल रही। भारत और नेपाल मित्र राष्ट्र हैं। दोनों देशों के बीच रोटी- बेटी का संबंध है। कुछ लोग जबरन विवाद पैदा करने का प्रयास करते हैं।

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