हल्द्वानी, जेएनएन : जमरानी बांध के साथ ही इससे बनने वाली पेयजल योजना को लेकर भी सरकार ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार के आदेश पर राज्य सरकार ने निगम और जल संस्थान से जमरानी बांध से बनने वाली पेयजल योजना की वाह्य सहायतित डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भारत सरकार को भेजने के आदेश दिए हैं। 

जमरानी बांध परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) ने ऋण देने पर सहमति दी है। फरवरी में एडीबी की टीम ने जमरानी बांध स्थल का निरीक्षण कर इससे होने वाले फायदों और आय की विस्तृत जानकारी ली थी। इस समय जल संस्थान और जल निगम ने जमरानी बांध बनने से हल्द्वानी की पेयजल योजना को लेकर प्रजेंटेशन दिया था। उस समय एडीबी की टीम ने पेयजल योजना बनाने के लिए बजट की जानकारी मांगी थी। 

वहीं लॉकडाउन की वजह से परियोजना निर्माण की कार्यवाही में लगा ब्रेक अब खुलने लगा है। राज्य सरकार के अपर सचिव ने पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर जमरानी बांध परियोजना से बनने वाली 316 करोड़ की पेयजल योजना की डीपीआर बनाकर केंद्र सरकार को भेजने को कहा है, जिससे धन  की व्यवस्था करके एडीबी को रिपोर्ट भेजी जाय। 

वहीं इस आदेश के बाद पेयजल सचिव डॉ भूपेंद्र कोर औलख ने आदेश जारी कर पेयजल निगम और जल संस्थान को जल्द से जल्द डीपीआर बनाकर केंद्र सरकार को भेजने के आदेश दिए हैं। जल संस्थान के हल्द्वानी डिवीजन के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार ने बताया कि पेयजल सचिव के आदेश पर जमरानी बांध से बनने वाली।

पेयजल योजना की डीपीआर बनाने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। यहाँ बात दे कि जमरानी बांध से पाइप लाइन बिछाकर दमुवादहूँगा में फिल्टर प्लांट बनना है। इसके अलावा ओवरहेड टैंक और शहर में पेयजल लाइन बिछाने की योजना है। जिससे हल्द्वानी की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सके और नलकूपों पर निर्भरता खत्म हो।

जमरानी बांध एक नजर में

बांध का निर्माण 624.48 हेक्टेयर भूमि पर होना है। कुल 10 किलोमीटर में झील का निर्माण होना है जिसकी चौड़ाई एक किमी होगी। 4.5 वर्ग किमी होगा जमरानी बांध का डूब क्षेत्र और 130.6 मीटर ऊंचाई होगी। डैम का 43 फीसदी पानी सिंचाई के लिए उत्तराखंड को और 57 फीसदी पानी यूपी को मिलेगा। इसमें कुल 208.60 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण करने की क्षमता होगी। डैम निर्माण से छह गांव प्रभावित और 120 परिवारों का होगा विस्थापन होगा। बांध से मिलने वाला पेयजल 117 एमएलडी होगा। यहां 14 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा। बांध के जलाशय से 57065 हेक्टेयर सिंचित हो सकेगी। इसके लिए विश्व प्रसिद्ध हैड़ाखान मंदिर को शिफ्ट करना पड़ सकता है। बांध निर्माण के लिए 22500 पेड़ों को काटना पड़ेगा।

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भाबर की पेयजल व सिंचाई की समस्या को देखते हुए पांच दशक पहले ही गौला नदी में बांध बनाने की जरूरत महसूस होने लगी थी। वर्ष 1975 में परियोजना के लिए गौला बैराज व नहरों का निर्माण शुरू हुआ। उस समय इसमें 25.24 करोड़ रुपये भी खर्च किए गए। वर्ष 1989 में 144.84 करोड़ की डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई। इसी बीच परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण की कई आपत्तियां लगती रहीं। वर्ष 2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई थी, जो अब 2584 करोड़ रुपये पहुंच गई है। बीते दिसंबर में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 2584 करोड़ रुपये की परियोजना को वित्तीय स्वीकृति दे दी। सिंचाई विभाग ने परियोजना निर्माण के लिए एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआइआइबी) से धनराशि मांगने के साथ ही उसकी ओर से दी गई शर्तों को पूरा कर लिया है।

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Edited By: Skand Shukla