हल्द्वानी, जेएनएन : गौला बैराज से प्रतिदिन बर्बाद होने वाले करीब दो करोड़ लीटर पानी को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। सिंचाई विभाग ने बैराज के गेटों की मरम्मत से लेकर कई कामों के लिए 4.63 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। निकाय चुनाव की आचार संहिता हटते ही इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के साथ ही बजट आवंटित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

गौला नदी में वर्ष 1984 में बैराज का निर्माण हुआ था। समय-समय पर छुटपुट मरम्मत होत रहे, मगर अब बैराज काफी क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे एक से दो करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद हो रहा है। वहीं हल्द्वानी के विस्तार के साथ ही पेयजल की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि गौला नदी से पर्याप्त पानी जलसंस्थान को नहीं मिल पा रहा है। इस पर सिंचाई विभाग ने बैराज की खराब दशा से प्रतिदिन हो रहे पानी के नुकसान को रोकने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता तरुण बंसल ने बताया कि कुछ दिनों पहले 4.63 करोड़ का प्रस्ताव बैराज की मरम्मत के लिए भेजा गया है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि पखवाड़ा भर पहले मुख्यालय स्तर पर बैराज से हो रही पानी की बर्बादी का मामला उठाकर प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए मजबूत पैरवी की गई थी। शासन स्तर से भी बैराज की मरम्मत के प्रस्ताव को हरी झंडी देने के संकेत मिले हैं।

ये होंगे काम

इस धनराशि से बैराज के सभी छह गेटों की मरम्मत की जाएगी। इसके अलावा बैराज के डाउन स्ट्रीम में ग्रेनाइड पत्थर लगाए जाएंगे। सीसी ब्लाक व रिटेनिंग वॉल का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि बरसात में बैराज को होने वाली क्षति को रोका जा सके। मरम्मत पूरा होने से एक से दो करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन बर्बाद होने से बचेगा। इस पानी को जलसंस्थान को पेयजल आपूर्ति के लिए दिया जाएगा।

बोल्डर टकराने से होती है क्षति

सिंचाई विभाग के अवर अभियंता मनोज तिवारी ने बताया कि बरसात के दिनों में गौला का जलस्तर काफी बढ़ा रहता है। पहाड़ों से काफी तेज गति के साथ बोल्डर, पत्थर, रेता-बजरी व मलबा आता है। ये सभी बैराज के गेटों से टकराते हैं, जिससे बैराज को क्षति पहुंचती है। अगर समय पर बैराज की मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में पानी की बर्बादी और बढऩे की संभावना बनी रहेगी। गेट भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

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Edited By: Skand Shukla