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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मंडियों में तीन से पांच रुपए किलो प्याज बेचने के लिए मजबूर हुए किसान Naninital News

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Sat, 30 May 2020 08:43 PM (IST)

कभी ऊंचे दामों के कारण ग्राहकों के आंसू निकालने वाला प्याज अब किसानों के लिए मुसीबत बनया गया है।

मंडियों में तीन से पांच रुपए किलो प्याज बेचने के लिए मजबूर हुए किसान Naninital News
मंडियों में तीन से पांच रुपए किलो प्याज बेचने के लिए मजबूर हुए किसान Naninital News

हल्द्वानी, जेएनएन : कभी ऊंचे दामों के कारण ग्राहकों के आंसू निकालने वाला प्याज अब किसानों के लिए मुसीबत बनया गया है। पहले प्रकृति का सितम और अब कोरोना महामारी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। हल्द्वानी की मंडी में 20 रुपए किलो बिकने वाली गौलापार की प्याज़ का दाम तीन से पांच रुपए किलो तक में सिमट गया है। लॉकडाउन में शहर के तमाम होटल-रेस्तरां बंद होने से प्याज़ के ख़रीदार कम हो गए हैं। वहीं दूसरे जिले व राज्यों की मंडियों में गौलापार की प्याज़ पहुंच नहीं पा है। एेसे में क्षेत्र के किसान प्याज़ को औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर हैं।

गौलापार में 600 एकड़ में प्याज बोए थे किसान

इस बार गौलापार में क़रीब 600 एकड़ में किसानों द्वारा प्याज़ बोई थी। लेकिन बेमौसम ओलावृष्टि से क़रीब 60 प्रतिशत फ़सल बर्बाद हो चुकी है। बची खुची कसर कोरोना ने पूरी कर दी है। लॉकडाउन के कारण माल बाहर नहीं जा पा रहा है। डंप होने के कारण प्याज सड़ जा रही है। ऐसे में औने-पौन दाम में बेचने को मजबूर हैं। गौलापार के किसान यशवंत सिंह मेहरा ने बताया कि पांच एकड़ में प्याज लगाई थी। लॉकडाउन के कारण रेट नहीं मिल रहा है। तीन से पांच रुपए किलो बेचना पड़ रहा है।

प्याज किसानों का सुनिए दर्द

देवला मल्ला गौलापार के दीपक मेहरा ने बताया कि पहले से ही बारिश के कारण काफी नुकसान झेलना पड़ा है। अब मंडी में प्याज़ का उचित दाम नहीं मिलने प्याज सड़ने लगी है। चंदन सिंह कार्की का कहना है कि चार बीघे में लोकल प्याज बोई थी ।ओलों से प्याज़ की फ़सलो को काफी क्षति तिहाई है। अब लागत भी निकालना मुश्किल है। विश्वविजय सिंह देव, सचिव मंडी समिति ने बताया कि लॉकडाउन से काश्तकार काफ़ी परेशान हैं। फिर भी किसानों को उनके उपज का सही दाम मिल सके, इसके लिए मंडी समिति हर स्तर से प्रयास कर रही है।

इन मंडियो में जाता है गौलापार का प्याज़

गौलापार का प्याज पिछले वर्ष बरेली, रामपुर, धामपुर, काशीपुर व हरिद्वार की मंडियों में रोज़ाना क़रीब दस गाडियों में जाता था लेकिन इस बार डिमांड न होने के कारण किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा रहा है।

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