अरविंद कुमार सिंह, काशीपुर : अब घरों, होटलों व रेस्टोरेंट में खराब कुकिंग तेल को फेंकने की जरूरत नहीं है। इसके बदले में फ्री में फ्रेस रिफाइन तेल मिलेगा। इससे न केवल लोगों को जानलेवा जैसी कई बीमारियों से राहत मिलेगी, बल्कि खराब तेल से डीजल भी बनेगा। खराब तेल का 90 फीसद डीजल तैयार होगा, जिसका ट्रैक्टर, जनरेटर आदि में इस्तेमाल हो सकता है। इस तकनीकी का पेटेंट हो चुका है। डीजल बनाने की तकनीकी का पहला डेमो केंद्रीय विद्यालय देहरादून में होगा। चाइना की तर्ज पर भारत में भी खराब तेल को एकत्र करने के लिए सेंटर बनाए जाएंगे।

घरों, होटलों, रेस्टोरेंट, ठेलों व ढाबों में खाद्य पदार्थों को तलने के बाद रिफाइन तेल बच जाता है। कुछ लोग इसे फेंक देते हैं तो कुछ लोग इस तेल को कुछ समय बाद दोबारा गरम कर इस्तेमाल करते हैं। इससे लीवर, पेट संबंधित बीमारियां व कैंसर होने की संभावना बनी रहती है। सरकार ने जून 2018 में रिसाइकिल यूज्‍ड कुकिंग ऑयल (आरयूसीओ) मिशन चलाया है। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज आत्रेय ने खराब कुकिंग तेल से डीजल बनाने पर वर्ष 2010 में शोध कार्य शुरू किया। करीब आठ साल बाद सफलता मिली और इसका पेटेंट भी हो चुका है। फूड सेफ्टी सिक्योरिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मानक के तहत ब्रांडेंड रेस्टोरेंटों में लागू हैं। जहां पर इसका ख्याल किया जा रहा है। खराब तेल से डीजल बनने पर देश में आर्थिक के क्षेत्र में एक क्रांति आएगी। बाहर से डीजल मंगाने पर लोड कम हो जाएगा।

ऐसे नुकसान करता है तेल

किसी बर्तन में रिफाइन कुकिंग में तली चीजें निकालकर छोड़ देते हैं तो तेल ठंडा होने पर बर्तन के आसपास पानी की बूंदे बन जाती हैं। पानी में ऑक्सीजन व हाइड्रोजन होता है। दोबारा तेल गरम करने पर ऑक्सीजन रिएक्ट करता है, जो सेहत के लिए घातक है, इसलिए कुकिंग तेल को एक बार गरम के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

देश में हर साल खपत होती 20 मिलियन टन तेल

देश में हर साल 20 मिलियन टन कुङ्क्षकग तेल की खपत होती है। हर साल पांच मिलियन टन खराब तेल एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जगह जगह सेंटर बनाए जाएंगे। फिलहाल 10 लीटर खराब तेल के बदले एक लीटर फ्रेस रिफाइन तेल मुफ्त में दिया जाएगा। चाइना में पांच लीटर पर एक लीटर तेल दिया जाता है।

12 हजार करोड़ मुद्रा नहीं जाएगा देश से बाहर

देश में डीजल व पेट्रेाल का उत्पादन कम होने से दूसरे देशों से मंगाना पड़ता है। देश में हर साल 120 मिलियन टन डीजल की खपत है। यदि पांच मिलियन टन खराब कुकिंग तेल से साढ़े चार मिलियन टन डीजल तैयार होगा, जो 12 हजार करोड़ रुपये का डीजल देश में ही तैयार हो जाएगा और इतने रुपये  दूसरे देशों में नहीं जा सकेंगे।

ऐसे तैयार होगा डीजल

कमरे में मिथनाल, कैटालिस्ट व एक रेसिपी खराब तेल में मिलाते हैं। करीब एक घंटे के बाद डीजल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। तीन घंटे में डीजल तैयार हो जाता है। डीजल बनाने की प्रक्रिया को रूम टेंपरेचर बॉयोडीजल तकनीकी कहते हैं।

तेल के बनाए जाएंगे कलेक्शन सेंटर : डॉ. आत्रेय

जसपुर खुर्द स्थित एक रिसार्ट में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने आए डॉ. नीरज आत्रेय, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने बताया कि चाइना की तर्ज पर खराब कुकिंग तेल का कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे। खराब तेल से डीजल बनाने की विधि के बारे में सोमवार को केंद्रीय विद्यालय देहरादून व मंगलवार को विज्ञान भवन दिल्ली में राष्ट्रपति के सामने डेमा किया जाएगा। खराब तेल से डीजल बनाने पर हर साल 12 हजार करोड़ रुपये का डीजल दूसरे देशों से नहीं मंगाना पड़ेगा। इस तकनीकी का पेटेंट हो चुका है।

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Posted By: Skand Shukla

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