जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ : सामरिक महत्व का कूलागाड़ पुल बहने से चीन व नेपाल सीमा का संपर्क भंग हो गया है। आम जनता से लेकर सुरक्षा बलों की परेशानी बढ़ गई है। जल्द पुल नहीं बना तो आपदा काल में सीमांत का संकट बढ़ जाएगा। बेली ब्रिज बनने में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में चीन सीमा से लगे उच्च हिमालयी क्षेत्र में मदद के लिए प्रशासन ने हेलीकॉप्टर सेवा पर विचार किया है।

धारचूला तहसील मुख्यालय से सात किमी की दूरी पर बहने वाला कूलागाड़ सदाबहार बड़ा नाला है। इस पर माइक्रोहाइडिल परियोजना है, जिससे बिजली उत्पादित होती थी। इधर कूलागाड़ परियोजना को अपग्रेड होना है। पूर्व में भी कूलागाड़ अपना विकराल रू प दिखा चुका है। सामरिक दृष्टि से देखें तो कूलागाड़ का पुल मील का पत्थर है। यह टनकपुर-तवाघाट हाईवे पर धारचूला से चीन सीमा को सीधे जोड़ता है। इसी पुल से होकर चीन सीमा से लगे व्यास और दारमा घाटी पहुंचा जाता है।

जून के पहले सप्ताह की बारिश के बाद चीन सीमा से लगा क्षेत्र 22 दिनों से अलग-थलग पड़ा है। तब तवाघाट से आगे दोनों घाटियों को जोडऩे वाले मार्ग बंद थे। कूलागाड़ पुल बहने से अब तवाघाट का भी संपर्क कट गया है। इसी मार्ग से उच्च हिमालयी ग्रामीणों सहित सुरक्षा बलों के लिए सभी वस्तुओं की आपूर्ति होती है। चीन सीमा से लगे 60 से अधिक गांव इस पुल के बहने से मुख्य धारा से कट गए हैं।

तत्काल राहत के नाम पर लकड़ी के लट्ठे डालकर पैदल पुल बनाया गया है। प्रशासन ने बीआरओ को तत्काल मोटर पुल बनाने के निर्देश दिए हैं। अब बीआरओ यहां पर बेली ब्रिज का निर्माण करेगा। इसमें भी 20 दिन का समय लगेगा।

जिलाधिकारी आनंद स्वरूप ने बताया कि कूलागाड़ में अस्थाई पैदल पुल बना दिया गया है। इससे क्षेत्र में राहत कार्य के लिए सामान पहुंचाया जा सकता है। बीआरओ को शीघ्र मोटर पुल बनाने के लिए कहा गया है। फिलहाल सीमांत में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी।

Edited By: Prashant Mishra