नैनीताल, जेएनएन : केंद्रीय सूचना आयोग ने चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी के मामले में सीबीआई को झटका दिया है। आयोग ने कहा है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सीबीआई आरटीआइ एक्ट की धारा-24 के अंतर्गत अधिसूचित संस्थान होने के तर्क देकर सूचना देने से इन्कार नहीं कर सकती है। आयोग ने यह निर्णय उत्तराखंड कैडर के चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 नवंबर को जारी किया है।

एम्‍स में किया था भ्रष्‍टाचार का खुलासा

आइएफएस संजीव ने 2017 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) रहते भ्रष्टाचार के तमाम मामलों का पर्दाफाश किया था। संजीव ने आरटीआइ में आवेदन कर एम्स में छह हजार करोड़ का निर्माण संबंधी घोटाला तथा मेडिकल उपकरणों व रसायनों की खरीद से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों की सीबीआइ जांच की रिपोर्ट की प्रति मांगी थी। इन सारे मामलों की जांच उनके द्वारा जुलाई 2012 से अगस्त 2014 में एम्स के सीवीओ रहते की गई थी। संजीव का आरोप था कि उनके सीवीओ पद से हटते ही इन मामलों की जांच दबा दी गई।

सीबीआइ ने सूचना देने से किया था मना

सीबीआइ ने संजीव को यह कहते हुए सूचना देने से मना कर दिया था कि 2012 की अधिसूचना के अनुसार आरटीआइ एक्ट की धारा-24 के अंतर्गत सीबीआई को सूचना देने से छूट प्राप्त है। इसके विरुद्ध संजीव ने केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की। 25 नवंबर को नैनीताल से वीडियोकांफ्रेंसिंग के जरिये इस मामले में सुनवाई हुई थी।

संजीव के ही मामले में हाई कोर्ट के फैसले को बनाया आधार

फैसले में दिलचस्प तथ्य यह है कि आयोग ने अपने निर्णय का आधार बनाने के लिए संजीव के ही अन्य मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के 2017 में दिए फैसले का उल्लेख किया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने संजीव के पक्ष में फेसला देते हुए केंद्र की इंटेलीजेंस ब्यूरो (आइबी) को आदेश दिया था कि संजीव के बारे में बनाई गई खुफिया रिपोर्ट की जानकारी तत्काल साझा की जाए। सीबीआइ की तरह आइबी भी आरटीआइ एक्ट की धारा-24 के तहत अधिसूचित है।

दो सौ मामलों में हुई कार्रवाई

एम्स में दो साल के दौरान भ्रष्टïाचार से संबंधित दो सौ मामलों में कार्रवाई की। जिनमें सेवा से बर्खास्तगी से लेकर सीबीआइ में केस रजिस्टर कराने तक की कार्रवाई शामिल थी। इन मामलों में एम्स के तत्कालीन निदेशक समेत वरिष्ठ अफसरों का नाम सामने आया था।

आरटीआइ की धारा-24 में यह है प्रावधान

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा-24 के अंतर्गत आइबी व रॉ जैसे केंद्रीय संस्थानों को रखा गया है। जो राष्टï्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए कार्य करते हैं। आरटीआइ एक्ट की धारा-24 में इन संस्थानों को छूट दी गई है। इस धारा में यह भी कहा है कि भ्रष्टïाचार तथा मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़े मामलों में इन संस्थानों को भी सूचना देनी पड़ेगी।

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Posted By: Skand Shukla

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