नैनीताल, जेएनएन : हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा नगरपालिका में 2007 के एक टेंडर प्रक्रिया में हुई धांधली के मामले में तत्कालीन पालिकाध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी, अवर अभियंता समेत छह अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश सीबीसीआइडी को दिए हैं। साथ ही सीबीसीआइडी को एक जनवरी से पूर्व की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से पूछा है कि अनियमितताओं के बाद भी विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सुनवाई मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खंडपीठ में हुई ।

मामले के अनुसार अल्मोड़ा निवासी एलके पंत व संजय अग्रवाल ने हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष को 2013 में पत्र लिखा था। इसमें कहा था कि अल्मोड़ा नगरपालिका में 2007 में करीब 4.90 करोड़ रुपये की लागत के कार्यों के लिए निविदा जारी की थी, लेकिन निर्धारित समय में कोई भी निविदा न आने पर टेंडर नहीं हुआ। इसके बाद पालिका ने 2009 में समाचार पत्रों में बिना प्रकाशन किए ही निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी। जिनमें दो धर्मशालाओं के अलावा एनटीडी में चिल्ड्रन पार्क व ट्रक स्टैंड का निर्माण शामिल था। इस निविदा प्रक्रिया में दिल्ली की कंपनी की दर कम थी, लेकिन नगर पालिका ने टेंडर देहरादून की कंपनी का स्वीकृत करते हुए उसे करीब 50 लाख अग्रिम भुगतान भी कर दिया।

इस प्रक्रिया को टेंडर नियमावली के खिलाफ मानते हुए मुख्य न्यायधीश ने इस पत्र को ही 2013 में जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत किया था। साथ ही मामले की जांच सीबीसीआइडी को दी थी। सीबीसीसीआइडी ने 2015 में जांच पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में दे दी थी । जिस पर कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। अभी तक कार्रवाई न होने पर खंडपीठ ने तत्कालीन चेयरमैन व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई दो जनवरी को होगी।

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Posted By: Skand Shukla

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