मनीस पांडेय, रुद्रपुर : आंध्र प्रदेश की जिन मछलियों को बिहार में प्रतिबंधित कर कड़ी सजा का ऐलान किया गया है, वे मछलियां जिले व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में खपाई जा रही हैं। बिना पर्याप्त जांच व विभागीय गंभीरता बरते यह कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी का सबब हो सकता है।

किच्छा में बड़ा मछली बाजार है, जहां आंध्र प्रदेश से रोज मछलियों की आपूर्ति हो रही है। विभिन्न ट्रकों के जरिये कई टन मछली किच्छा मछली बाजार पहुंचती है। यहां से इन्हें जिले में वितरित किया जाता है। ऐसे में आंध्रप्रदेश से लाई जा रही मछलियों की पैकिंग में फार्मेलिन जैसा खतरनाक रसायन हो सकता है, जिससे लोगों को स्वाद के चक्कर मेें गंभीर बीमारी हो सकती है। जबकि जिले का मत्स्य विभाग का कहना है कि मछलियों की जांच के लिए नमूने लिए गए हैं। जिसकी रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।

मछलियों को ताजा रखता है यह जहर

मानव स्वास्थ्य के लिए जहर की तरह काम करने वाला फार्मेलिन मछलियों को कई दिनों तक ताजा रखने के लिए प्रयोग होता है। आंध्र प्रदेश से मछलियों को यहां आने में कई दिन लग जाते हैं, इसके बाद उसे बिकने में भी समय लगता है। इस अवधि में मछलियां सड़ सकती हैं। उन्हें कई दिनों तक ताजा रखने के लिए मुनाफाखोर इस रसायन का लेप कर रहे हैं। इसीलिए बिहार की राजधानी पटना में ऐसी मछलियां प्रतिबंधित हैं। इन मछलियों के बेचने व भंडारण पर सात साल की जेल व 10 लाख जुर्माने का प्रावधान है।

किडनी, लीवर डैमेज व कैंसर का खतरा

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फार्मेलिन का शरीर में पहुंचना बहुत हानिकारक है। इससे पाचन तंत्र की समस्या होती है, जिससे पेट दर्द से लेकर डायरिया की समस्या होती है। इससे किडनी और लीवर डैमेज होने के साथ कैंसर आदि बीमारियों का भी खतरा होता है।

आंध्र प्रदेश से आ रही हैं मछलियां

एसके छिम्वाल, सहायक निदेशक, मत्स्य, ऊधमसिंह नगर ने बताया कि जिले में आंध्र प्रदेश से मछलियां किच्छा मछली बाजार में आ रही हैं। फार्मेलिन के खतरे को देखते जांच नमूने लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है। 

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Posted By: Skand Shukla