Road Safety With Jagran: हरिद्वार में शहर और देहात में दौड़ रहे अनियंत्रित 'बूढ़े' वाहन
Road Safety With Jagran हरिद्वार में शहर और देहात में अनियंत्रित बूढ़े वाहन दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग का दावा सभी निर्धारित पैरामीटर पर फिटनेस की जांच होती है। बगैर फिटनेस दौड़ रहे 835 वाहनों के चालान किए गए हैं।

जागरण संवाददाता, हरिद्वार: Road Safety With Jagran हरिद्वार में बिना फिटनेस सड़कों पर वाहन दौड़ रहे हैं। इनमें जुगाड़ वाहनों की बड़ी तादाद है। ओवरलोड वाहन चालक यातायात नियमों का भी पालन नहीं करते। इतना ही नहीं, शहर और देहात में उम्र पूरी कर चुके वाहनों की संख्या भी काफी अधिक है। नियमों का पालन कराने में परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और थाना पुलिस का अभियान खानापूर्ति रहा है।
हालांकि परिवहन विभाग का दावा है कि वाहनों के फिटनेस टायर, एंटी फागिंग लाइट, लाइ लैंप बीम्स, रिफ्लेक्टर, टायरों की स्थिति, हार्न, डैश बोर्ड इक्यूपमेंट, रियर व्यू मिरर, स्पीडोमीटर, विंड सील्ड वाइपर समेत अन्य सुरक्षा प्रणाली की जांच के बाद ही फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। समय-समय पर अभियान चलाकर बगैर फिटनेस सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों के चालान भी किए जाते हैं।
एआरटीओ रश्मि पंत ने बताया कि जनवरी से अक्टूबर तक ऐसे 835 वाहनों के चालान किए गए और इनसे करीब 41.75 लाख रुपये जुर्माना भी वसूला गया। हरिद्वार में सिडकुल, औद्योगिक क्षेत्र शहर और बहादराबाद औद्योगिक क्षेत्र में हजार से अधिक इकाइयां हैं।
इन इकाइयों में भारी मालवाहक वाहन विभिन्न राज्यों से आते हैं, जबकि हरिद्वार में उप्र, उत्तरखंड से भी वाहन माल लेकर पहुंचते हैं। इन वाहनों के चालक जहां यातयात नियमों का उल्लंघन करते दिखे हैं, वहीं फिटनेस प्रमाण पत्र लेना भी चालक और वाहन मालिक मुनासिब नहीं समझते।
खासकर देहात क्षेत्र में उम्र पूरी कर चुके वाहन अधिक संख्या में धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। गांव से शहर आने वाले डग्गामार वाहन खस्ताहाल होने के बाद दौड़ रहे हैं। इसमें कई बार हादसे भी हो चुके हैं।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अब तक 311 सड़क दुर्घटनाएं हुई। इनमें 208 लोगों की मौत हो गई, जबकि 267 घायल हुए। इनमें अनफिट वाहन और अन्य तकनीकी और सुरक्षात्मक कारणों से जान गंवाने वालों की संख्या 77 रही।
बावजूद इसके यातायात विभाग, थाना पुलिस, परिवहन विभाग इस ओर ठोस कार्रवाई को लेकर गंभीर नहीं है। सर्दियों में स्थिति और भी बिगड़ जाती है। कागजात पूरे नहीं होने के चलते वाहनों को पुलिस से बचने के लिए तेजी से दौड़ाया जाता है। इसके चलते सड़कों पर ट्रैक्टर ट्राली, बड़े ट्रक, ओवरलोड वाहन तेजी से दौड़ते हैं। जो सड़क हादसों का कारण बनते हैं।
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हर वर्ष लेना होता फिटनेस प्रमाण पत्र
एआरटीओ प्रशासन रत्नाकर सिंह ने बताया कि व्यावसायिक वाहनों के लिए पहले आठ साल तक प्रत्येक दो वर्ष में फिटनेस प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके बाद प्रत्येक फिटनेस जांच की अनिवार्यता है।
वहीं, गैर व्यावसायिक वाहनों के लिए 15 साल के साथ फिटनेस की जांच अनिवार्य है। हरिद्वार में क्रैश टेस्ट अभी नहीं हो रहा है। हालांकि इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। एयर बैग दस लाख से अधिक महंगे वाहनों में उपलब्ध है। फिटनेस के दौरान आरआइ इसकी भी जांच करते हैं। इसके अलावा टायर, एंटी फागिंग लाइट, ब्रेकिंग सिस्टम समेत अन्य मानकों की भी जांच की जाती है।
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