हरिद्वार, जेएनएन। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि वर्तमान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों में छात्र और छात्राओं की संख्या के अंतर को पाटने की जरूरत है। उन्होंने ऐसे संस्थानों के पूर्व छात्रों से समाज के कल्याण और वंचित लोगों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की में 19वें दीक्षा समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों में छात्रों की तुलना में छात्राओं की संख्या कम है। इस अंतर को समाप्त किया जाना चाहिए। इसरो से जुड़े अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रयान-दो का प्रक्षेपण पहले 15 जुलाई 2019 को होना था, तब वे इसरो सेंटर में मौजूद थे।

उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि वहां तीन प्रोजेक्ट मैनेजर में से दो महिलाएं थीं। इनमें से एक महिला वैज्ञानिक अपने छह माह के बच्चे को बेंगलुरू में अभिभावकों के पास छोड़कर आईं थीं। यह महिला दो महीने से लगातार इसरो सेंटर में कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य कर रही थीं। इसीलिए इसरो के वैज्ञानिकों पर देश को गर्व है।

राष्ट्रपति ने छात्र-छात्राओं शुभकामनाएं दी और कहा कि मेडल एवं डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों के लिए भी यह गर्व का क्षण है। कहा कि संस्थान के पूर्व छात्रों को अपने मातृ संस्थान के विकास के लिए योगदान देना चाहिए। करदाताओं के रूप में देशवासियों ने छात्रों की शिक्षा में योगदान दिया है। ऐसे में समाज के कल्याण और वंचित लोगों की सहायता के लिए पूर्व छात्रों को आगे आना चाहिए। 

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि युवाओं के सामने चुनौतियां हैं, लेकिन अगर चुनौतियों का ताकत से मुकाबला किया जाए तो वे अवसर में बदल जाती हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इंजीनियर देश हित में क्या कर सकते हैं और देश को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं, उन्हें इस पर विचार जरूर करना चाहिए। संस्थान के निदेशक प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों और विकास कार्यों के बारे में जानकारी दी।

इस बीच, राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नौ छात्र-छात्राओं को मेडल प्रदान किए। समारोह में 2029 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। समारोह में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद ने भी शिरकत की।

वश्वशांति और लोक समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ने किया रुद्राभिषेक

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विश्वशांति और लोक कल्याण के लिए पत्नी श्रीमती सविता कोविंद संग रुद्राभिषेक किया। कनखल स्थित हरिहर आश्रम के पारदेश्वर महादेव मंदिर में श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के सानिध्य में यह धार्मिक अनुष्ठान किया। 

राष्ट्रपति कोविंद दोपहर दो बजकर 50 मिनट पर आश्रम पहुंचे और शाम चार बजकर दस मिनट तक यहां रुके। सबसे पहले उन्होंने आश्रम के प्रांगण में शतायु पूरी कर चुके रुद्राक्ष के वृक्ष, द्वादश ज्यार्तिलिंग और महामृत्युंजय मंदिर में महादेव के दर्शन किए। इसके बाद पारदेश्वर महादेव मंदिर में करीब चालीस मिनट तक रुद्राभिषेक किया। जाने से पहले उन्होंने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने की कुटी में संतों के साथ अध्यात्म पर चर्चा की और आशीर्वाद लिया। स्वामी अवधेशानंद गिरि ने बताया कि राष्ट्रपति का यह निजी दौरा था। उन्होंने रुद्राभिषेक के दौरान विश्वशांति, लोककल्याण और राष्ट्र की समृद्धि की कामना की। 

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Posted By: Sunil Negi

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