हरिद्वार, जेएनएन। जिला प्रशासन की ओर से राजस्थान से आए गढ़वाल के प्रवासियों को गृह जनपदों को भेज दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट जगदीश लाल ने बसों को सेनिटाइज कराया। मेडिकल टीम ने परीक्षण के बाद उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया।

एआरटीओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि राजस्थान से आए उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, पौड़ी, चमोली आदि जिले के 581 लोगों को बसों से भेज दिया गया है। जैसलमेर राजस्थान से आए 95 यात्रियों को यहीं रोका गया है। इसके अलावा गढ़वाल क्षेत्र के हरिद्वार में फंसे 438 लोगों को भी मेडिकल परीक्षण के बाद उनके घरों की तरफ भेज दिया गया है। इनमें सात उप्र और एक हरियाणा का है। 

वहीं, गत देर रात पहुंची सूरत से पहुंची दूसरी ट्रेन के 773 प्रवासियों को 29 बसों से गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों को भेज दिया गया। इनमें से लगभग 600 लोगों को रात में विभिन्न जिलों के लिए रवाना कर दिया गया था। शेष को हरिद्वार शहर के विभिन्न बैंक्वेट हॉल में रोका गया था। जिन्हें मेडिकल परीक्षण और भोजन कराने के बाद 29 बसों से गृह जनपदों के लिए रवाना कर दिया गया। उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों के 50 लोगों को पथरी क्षेत्र के पदार्था में राहत शिविर में भेज दिया गया है। बताया गया है कि अभी उत्तर प्रदेश से इनको भेजने की अनुमति नहीं दी गई है।

बीइंग भगीरथ ने कराया भोजन

बीइंग भगीरथ टीम ने ट्रेनों से हरिद्वार पहुंचे उत्तराखंड के प्रवासी श्रमिकों को जलपान व फलाहार वितरित किया। ट्रेन से आने वाले श्रमिकों के हाथों को सेनिटाइज भी किया गया। बीइंग भगीरथ के संयोजक शिखर पालीवाल ने कहा कि टीम के सदस्य लॉकडाउन में दिनरात सेवा कार्य कर रहे हैं, जिसमें अपनी जान की परवाह किए बगैर पूरे तन, मन, धन के साथ बीइंग भगीरथ की ऊर्जावान टीम जरूरतमंदों को अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

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भटक रहे बिहार और उत्तर प्रदेश के लोग

उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश के लोगों को भेजने की कोई व्यवस्था नहीं है। ये लोग भल्ला स्टेडियम के बाहर पहुंचे, लेकिन उन्हें भेजने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिला पर्यटन विकास अधिकारी सीमा नौटियाल ने बताया कि पास जारी नहीं होने के कारण यात्री नहीं जा सके। उम्मीद है कि कुछ लोग गुरुवार को रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि 26 यात्री असम के फंसे हुए हैं। जिनकी अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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