जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Haridwar Kumbh Mela 2021 सोलह बैंड दल, ऊंट-घोड़े पर सवार और पैदल चल रहे सैकड़ों नागा संन्यासियों की जमात का रंग अखाड़े के ईष्ट देव भगवान भाष्कर के तेज में अलग ही चमक बिखेर रहा था। मौका था कुंभनगरी हरिद्वार में निकाली गई तपोनिधि श्रीपंचायती अखाड़ा आनंद की पेशवाई का। अखाड़े के परंपरागत हथियार और वाद्ययंत्र लिए हर-हर महादेव का जयघोष करते नागा संन्यासी अपने दिव्य दर्शनों से जनमानस को निहाल कर रहे थे। हेलीकॉप्टर से हो रही पुष्प वर्षा के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष समेत निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत और महंत भी पेशवाई की शोभा बढ़ा रहे थे। 

एसएमजेएन कॉलेज में अखाड़े के ईष्ट सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करने के बाद शुक्रवार सुबह 11 बजे पेशवाई कुंभनगरी स्थित छावनी के लिए रवाना हुई। जमात की अगुआई आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि कर रहे थे। वह अखाड़े की धर्मध्वजा के पीछे फूलों से सजी बग्घी पर विराजमान थे। उनके पीछे हाथी, घोड़ों व ऊंट पर सवार अखाड़े के अन्य संत थे। युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते चल रहे नागा संन्यासियों से आशीर्वाद लेने के लिए पेशवाई मार्ग के दोनों श्रद्धालु कतारबद्ध खड़े थे। नागा संन्यासियों का जो वैभव आनंद अखाड़े की पेशवाई में नजर आया, वह अब तक अन्य किसी अखाड़े की पेशवाई में नहीं दिखाई दिया।

चंद्राचार्य चौक, शंकर आश्रम, सिंहद्वार, कृष्णानगर, शंकराचार्य चौक, तुलसी चौक होते हुए शाम करीब छह बजे पेशवाई ने अखाड़े की छावनी में प्रवेश किया। पेशवाई में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के साथ सचिव श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी और मंसा देवी मंदिर के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी समेत अन्य श्रीमहंत व महंत भी शामिल हुए।

संत समाज ने किया स्वागत

जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह शास्त्री, निर्मल अखाड़े के कोठारी महंत जसविंदर सिंह, महंत देवेंद्र सिंह, मुखिया महंत भगतराम, महंत जगतार मुनि, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी चिदविलासानंद, महंत दामोदर दास, महंत निर्मल दास, महंत रूपेंद्र प्रकाश, महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत अमनदीप सिंह सहित कुंभनगरी पहुंचे संपूर्ण संत समाज ने जगह-जगह पेशवाई का स्वागत किया।

आदि शंकराचार्य की परंपरा का निर्वहन 

आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि ने सभी को कुंभ मेले की बधाई दी। कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखाड़ा परंपरा के तहत अनादि काल से अखाड़े धर्म-संस्कृति की रक्षा का उत्तरदायित्व निभा रहे हैं। कुंभ के दौरान निकलने वाली अखाड़ों की पेशवाई सनातनी संस्कृति की विशेषता को प्रदर्शित करती है।

कुंभ से विश्व को सकारात्मक संदेश 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि जमात के रूप में अपने ईष्ट देव के साथ नागा सन्यासियों व संतों का छावनी प्रवेश कुंभ का महत्वपूर्ण चरण है। सही मायने में नागा संन्यासियों व संतों के छावनी प्रवेश के बाद ही कुंभ शुरू होता है।

निरंजनी अखाड़े ने दी बधाई

निरंजनी अखाड़े के सचिव एवं मंसा देवी मंदिर के श्रीमहंत रविंद्रपुरी व श्रीमहंत रामरतन गिरि ने कहा कि निंरजनी के बाद आनंद अखाड़े के संतों के छावनी प्रवेश के साथ कुंभ से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां तेजी से शुरू हो जाएंगी। कोरोना काल के चलते भी बड़ी संख्या में संत-महापुरुषों के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ रही है। 

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