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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bangladesh Crisis: हरिद्वार के साधु-संतों ने की हिंदुओं की रक्षा की मांग, कहा- 'उन्हें भारत में शरण दें'

Published: Thu, 08 Aug 2024 10:14 AM (IST)

Bangladesh Crisis अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की है ...और पढ़ें

Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर गहरी चिंता
Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर गहरी चिंता

HighLights

  1. भारत सरकार हिंदुओं की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाए- महंत रवींद्र पुरी
  2. हिंदुओं को भारत में शरण देने के लिए योजना बनानी चाहिए

जागरण संवाददाता, हरिद्वार। Bangladesh Crisis: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर गहरी चिंता व्यक्त की है और केंद्र सरकार से इस मामले में दखल करने की मांग की है।

साधु संतों का कहना है कि पहले तो केंद्र सरकार को वहां पर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए कूटनीतिक रूप से पहल करनी चाहिए और यदि वहां पर हिंदुओं पर हमले नहीं रुकते तो वहां के हिंदुओं को भारत में शरण देने के लिए योजना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत ने बांग्लादेश बनाया और आज भारत के खिलाफ वहां पर, जो माहौल है, वह चिंताजनक है।

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हमलों की कठोर शब्दों में निंदा

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दोनों धड़ों के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी यतिंद्रानंद गिरि ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्‍याचार हो रहे हैं।

हम सब हमलों की कठोर शब्दों में निंदा करती है और इस मामले में वह केंद्र सरकार के साथ है। केंद्र सरकार को इस बारे में कठोर कदम उठाने चाहिए।

महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा परिषद केंद्र सरकार द्वारा कुछ साल पहले बनाए गए उस अध्यादेश और नियम का समर्थन करती है जिसमें बांग्लादेश, पाकिस्तान तथा अन्य देशों में रहने वाले हिंदुओं, जैन, सिख, बौद्ध को भारत आने और उन्हें भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था।

आज इस कानून और नियम की बहुत जरूरत है, यह बांग्लादेश की घटना ने साबित कर दिया है।

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