संवाद सूत्र, डोईवाला (देहरादून)। हिमालयन हास्पिटल की छाती एवं श्वास रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राखी खंडूरी ने कहा कि स्लीप डिसऑर्डर को लोग गंभीरता से नहीं लेते। फलस्वरूप इसके दुष्प्रभाव से मोटापा, हृदय रोग, मधुमेह, पक्षाघात, मानसिक रोग के रूप में सामने आते हैं। डॉ. राखी खंडूरी ने बताया कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) नामक बीमारी कुछ साल पहले तक 40 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों में पाई जाती थी। एक स्टडी के मुताबिक इन दिनों तीन से 12 फीसद बच्चे सोते समय खर्राटे लेते हैं।

उन्होंने बताया कि हिमालयन हॉस्पिटल निंद्रा रोग से पीड़ितों के उपचार के लिए विशेष स्लीप क्लिनिक संचालित करती है। पॉलीसोमोनॉग्राफी के जरिये रोगी की पूरी रात स्लीप स्टडी की जाती है, जिससे उसके रोग की असल वजह व निदान को लेकर उपचार किया जाता है। डॉ. राखी ने बताया कि 19 मार्च को विश्व निंद्रा रोग दिवस है। इस उपलक्ष्य में 18 मार्च को हिमालयन हॉस्पिटल जॉलीग्रांट में विशेष स्वास्थ्य परामर्श आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर का लाभ ज्यादा से ज्यादा व्यक्ति उठाएं।

क्या है निंद्रा रोग 

यह रोग सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों में पाया जाता है। पुरुषों में इस रोग की संभावना अधिक होती है। इस बीमारी में व्यक्ति को खर्राटे आते हैं। कभी-कभी व्यक्ति को ऐसा लगता है जैसे नींद में उसकी सांस रुक गई है ये लोग नींद में बोलते भी है। कुछ लोग नींद के दौरान तेजाब गले में आने की शिकायत करते हैं। इन्हें रात में बार-बार पेशाब जाना पड़ता है। सुबह उठकर इन्हें लगता है जैसे कि नींद पूरी नही हुई। करीब तीस से चालीस प्रतिशत रोगी दिन में असमय ही सो जाते हैं। खर्राटे आना, मोटापा बढ़ना, दिन में ज्यादा नींद का आना, ड्राइविंग करते समय सो जाना, सोते समय अचानक सांस रुकने के अहसास से नींद टूट जाना, अनिंद्रा, नींद में चलना या बोलना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण हैं। 

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