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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 12, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

तीरथ की कोर टीम के नए चेहरों पर बंधी टकटकी, पढ़ि‍ए पूरी खबर

By Sunil NegiEdited By:
Published: Fri, 12 Mar 2021 08:11 AM (IST)

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पास वक्त बहुत कम और सामने चुनौतियों का पहाड़ है। 2022 के विधानसभा चुनाव में ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पास वक्त बहुत कम और सामने चुनौतियों का पहाड़ है।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पास वक्त बहुत कम और सामने चुनौतियों का पहाड़ है।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पास वक्त बहुत कम और सामने चुनौतियों का पहाड़ है। 2022 के विधानसभा चुनाव में महज दस महीने शेष रह गए हैं। केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करना है तो विकास कार्यों को गति देकर विधायकों की नाराजगी से पार पाना है। ये सब दारोमदार अब मंत्रिमंडल से इतर बनने वाली 'टीम तीरथ' पर होगा। पर्दे के पीछे काम करने वाली इस टीम को ही मुख्यमंत्री की कामयाबी और नाकामी के लिए जवाबदेह माना जाता है। नई टीम में सलाहकारों व रणनीतिकारों के रूप में किन अधिकारियों को जगह मिलेगी, इस पर नौकरशाहों, सियासतदां और जनता की टकटकी लगी है।

पार्टी हाईकमान ने कम समय में बड़ी चुनौती से निपटने की जिम्मेदारी तीरथ सिंह रावत के कंधों पर डाल दी है। इससे पहले जब यही जिम्मेदारी त्रिवेंद्र सिंह रावत को दी गई थी, उन्होंने भी सलाहकारों और अधिकारियों की टीम खड़ी की थी। वरिष्ठ व अनुभवी आइएएस और पीसीएस अधिकारियों की एक टीम तकरीबन चार साल तक त्रिवेंद्र सिंह रावत के भरोसेमंद रही। केंद्र की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के क्रियान्वयन, कोरोना संकट का सामना करने से लेकर हरिद्वार में कुंभ समेत तमाम पिछली त्रिवेंद्र सरकार के अहम मामलों में नीति निर्धारण में इस टीम का हस्तक्षेप साफ दिखाई पड़ा। यही नहीं जन संवाद और जन संपर्क में मुख्यमंत्री की मदद के लिए विशेष कार्याधिकारियों, सलाहकारों, मीडिया समन्वयकों की बड़ी टीम गठित की गई थी।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को अपने पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सिंह रावत की तुलना में मौजूदा सरकार की चुनौतियों को अंजाम देने के लिए बहुत कम वक्त मिला है। विधानसभा चुनाव में खम ठोकने से पहले नए मुख्यमंत्री को विकास कार्यों से लेकर जन अपेक्षाओं के मोर्चे पर खुद को साबित करना है। विधायकों की नाराजगी दूर करने के साथ ही नीतिगत फैसलों में मंत्रिमंडल के सहयोगियों, जनप्रतिनिधियों और पार्टी की भागीदारी और जनता को लेकर कोर एजेंडे को मूर्त रूप देने का काम मुख्यमंत्री को ही करना है। फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय से संबद्ध पुरानी टीम के साथ मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में गुरुवार को आइएएस शैलेश बगोली की तैनाती की गई है। नई जिम्मेदारी को उठाने के लिए अधिकारियों और सलाहकारों की नई टीम का गठन अभी होना बाकी है। अब देखना ये भी होगा कि तीरथ सिंह रावत टीम का गठन खुद ही करेंगे या इसमें पार्टी का भी सहयोग लेंगे।

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