देहरादून, जेएनएन। सितंबर से बीसीसीआइ का घरेलू सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन उत्तराखंड में क्रिकेट का संचालन कौन करेगा अभी तक साफ नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक माह की अवधि में टीम कैसे तैयार हो पाएगी। इसी के चलते प्रशासकों की समिति उत्तराखंड क्रिकेट पर अभी तक निर्णय नहीं ले सकी है।

उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता का फैसला बीसीसीआइ में जितना लटका रहेगा, उतना ही नुकसान यहां के खिलाड़ियों को उठाना पड़ेगा। मान्यता की देरी के चलते पिछले साल की तरह इस साल भी आयोजन समिति को टीम चयन समेत अन्य समस्याओं से जूझना पड़ेगा। 

ऐसी स्थिति में आनन-फानन में टीमें चुनी जाएंगी, जिसका खामियाजा पिछले सत्र की तरह राज्य के खिलाड़ियों को झेलना पड़ेगा। घरेलू सत्र 2018-19 में बीसीसीआइ ने उत्तराखंड को बिना मान्यता दिए बीच का रास्ता निकालकर यहां के खिलाड़ियों को अपने घरेलू सत्र में शामिल कर लिया था। 

खिलाड़ियों ने पहले ही सीजन में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवाया। राज्य की किसी भी एसोसिएशन को मान्यता नहीं होने से खिलाड़ियों  को सत्र के बाद भी खासा नुकसान झेलना पड़ा है। 

सत्र समाप्ति के बाद खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। वहीं, अन्य राज्यों की मान्यता प्राप्त एसोसिएशनों ने विशेष शिविर लगाकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। ट्रेनिंग दी। अब जब सितंबर में बीसीसीआइ का नया सत्र शुरू होने को है। ऐसे में अब अंतिम समय में चार से छह दिन के कैंप लगाए जाने की बात चल रही है। 

इसमें खिलाड़ियों को अधूरा प्रशिक्षण देकर मैदान में उतार दिया जाएगा। क्रिकेट संघ भी मान्यता न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इस संबंध में प्रशासकों की समिति से फोन व मेल के माध्यम से संपर्क साधा गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।

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Posted By: Bhanu

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