राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड कैबिनेट ने खनन व्यवसायियों को राहत देने और राजस्व बढ़ाने के दृष्टिगत उत्तराखंड स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट के लिए बनाई गई नीति में संशोधन किया है। इसके तहत अब स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट नदी तट से 50 मीटर की दूरी पर भी स्थापित हो सकेंगे। यह सीमा बरसाती नदी व नालों के लिए रखी गई है। वहीं हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे यह दूरी 1.5 किमी से घटाकर एक किमी और अन्य मैदानी नदियों के लिए यह दूरी घटाते हुए एक किमी से 500 मीटर कर दी गई है। पर्वतीय इलाकों में इन मानकों को 50 प्रतिशत रखा गया है। खनिज भंडारण के नियमों में भी शिथिलता प्रदान की गई है। इसके साथ ही रिवर ट्रेनिंग नीति का नाम बदल कर रिवर ड्रेजिंग नीति रखा गया है। इसमें नदी तल से तीन मीटर तक मलबा, खनिज उठाने का कार्य किया जा सकेगा।

गुरुवार को कैबिनेट ने खनन से संबंधित तीन नीतियों में संशोधन को मंजूरी दी। इसमें सबसे अहम स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट की नदी तट से दूरी कम की गई है। भाजपा सरकार ने ही वर्ष 2019 में नदी तट से स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट की दूरी बढ़ाई थी। सुरक्षा व खनन कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया था। अब सरकार ने खनन से कम हो रहे राजस्व को देखते हुए दूरी के मानक कम कर दिए हैं।

वहीं खनिज भंडारण के नियमों में बदलाव करते हुए अब भंडारण का स्थान मैदानी क्षेत्र की नदी तट से 500 मीटर किया गया है। पहले यह 1500 मीटर था। बरसाती नदी में यह दूरी मात्र 50 मीटर रखी गई है। पर्वतीय क्षेत्र की नदियों में यह दूरी 50 मीटर व बरसाती नदियों में 25 मीटर रखी गई है।

इसके साथ ही नदी में जमा उपखनिज को हटाने के लिए रिवर ट्रेनिंग के स्थान पर रिवर ड्रेजिंग नीति बनाई गई है। इसमें नदी में जमा मलबे को हटाने के लिए खुली बोली का प्रविधान किया गया है। इसके साथ तीन मीटर गहराई तक मलबा हटाने की व्यवस्था की गई है।

यह भी पढ़ें- गौला नदी में खनन ठेकेदारों में चल रहा वर्चस्व का खेल, वन विभाग-निगम की जिम्मेदारी से झाड़ रहे पल्‍ला

Edited By: Raksha Panthri