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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 13, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गौला नदी में खनन ठेकेदारों में चल रहा वर्चस्व का खेल, वन विभाग-निगम की जिम्मेदारी से झाड़ रहे पल्‍ला

By Skand ShuklaEdited By:
Published: Wed, 13 Oct 2021 08:44 AM (GMT+05:30)

नदी में पानी और सरकारी महकमों की अधूरी तैयारी की वजह से गौला में खनन सत्र अभी शुरू नहीं हो ...और पढ़ें

गौला नदी में खनन ठेकेदारों में चल रहा वर्चस्व का खेल, वन विभाग-निगम की जिम्मेदारी से झाड़ रहे पल्‍ला
गौला नदी में खनन ठेकेदारों में चल रहा वर्चस्व का खेल, वन विभाग-निगम की जिम्मेदारी से झाड़ रहे पल्‍ला

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : नदी में पानी और सरकारी महकमों की अधूरी तैयारी की वजह से गौला में खनन सत्र अभी शुरू नहीं हो सका, लेकिन वर्चस्व का खेल धड़ल्ले से जारी है। नदी बंद होने के बावजूद ठेकेदार इलाका घेरने में जुटे हैं। मजदूरों की मदद से रेत छनवाने के बाद जगह-जगह ढेर भी लगा दिए गए हैं। वन विभाग भले अभी सीमांकन का काम पूरा नहीं करवा सका, लेकिन घेरेबंदी में लगे लोगों ने डंडे व पत्थरों की मदद से अपना क्षेत्र तय कर लिया है। नदी का विधिवत शुभारंभ होते ही यह इलाका इनका हो जाएगा। पूरे मामले में वन विभाग और उसके ठेकेदार की भूमिका निभाने वाला वन निगम मौन है।

शीशमहल से लेकर शांतिपुरी तक अलग-अलग निकासी गेटों से उपखनिज निकाला जाता है। साढ़े सात हजार वाहन रोज नदी में उतरते हैं। बुग्गियों की तादाद अलग से है। हल्द्वानी से लेकर तराई तक फैली गौला को कुमाऊं की आर्थिक लाइफलाइन कहा जाता है। एक लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर इस खनन कारोबार से जुड़े हैं। चालक, परिचालक, मालिक, मैकेनिक, स्पेयर पाट्र्स कारोबारी से लेकर क्रशरों के कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं। फिलहाल नदी बंद है।

वहीं, उपखनिज की चोरी रोकने के लिए जून में गौला के निकासी गेटों के पास खोदी गई खाई को अभी पाटा नहीं गया है। ऐसा इसलिए कि वाहन अंदर न घुस सकें। हालांकि कुछ लोगों के लिए नदी अभी खुली है। मंगलवार को दैनिक जागरण ने टनकपुर व राजपुरा गेट का जायजा लिया तो मामले का पता चला। चुगान एरिया में जगह-जगह रेत छानने के बाद ढेर लगाए हुए थे। पत्थर रख व लकड़ी गाढ़कर बकायदा बाउंड्री भी तय की हुई थी। वहीं, वन विभाग व वन निगम पल्ला झाडऩे में लगे हैं। जबकि खनन कारोबार से जुड़े कई लोग पहले शिकायत भी कर चुके हैं।

गौला के रेंजर आरपी जोशी ने कहा कि गौला नदी दस साल के लिए वन निगम के पास है। हमारी टीम लगातार गश्त करती है। मगर वन निगम सहयोग नहीं कर रहा है। गेटों पर तैनात उसके कर्मचारियों को निगरानी करनी चाहिए। इस बावत डीएलएम को पत्र लिख चूका हूं। डीएलएम गौला वाइके श्रीवास्तव का कहना है कि इन दिनों सभी गेटों पर पंजीकरण को रिन्यूवल करने का काम चल रहा है। वन निगम के कर्मचारी भी इस काम में जुटे रहते हैं। अगर किसी ने उपखनिज का ढेर लगाया है तो हटाया जाएगा।