जागरण संवाददाता, देहरादून। चुनावी साल में शहरी मतदाताओं को रिझाने और नगर निकायों को मजबूत बनाने को लेकर सरकार ने रेड कारपेट बिछा दिया है। नगर निकायों को न सिर्फ आर्थिक रूप से मदद की जाएगी बल्कि उन्हें सशक्त बनाकर कंधे का बोझ भी हल्का किया जाएगा। इसी के तहत शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने गुरुवार को सभी शहरी निकायों की नब्ज टटोली और शहरी जन की समस्याओं की तह तक जाने की कोशिश की। मंत्री भगत ने समस्या चाहे पेयजल, सड़क, सीवर या सफाई की हो, सरकार उनका निदान करना चाहती है। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के महापौर, पालिकाध्यक्ष व अध्यक्षों से हुई वार्ता में मंत्री भगत ने कहा कि सरकार वित्त आयोग से ही नहीं बल्कि अन्य माध्यमों से भी निकायों को आर्थिक सहायता देगी, लेकिन शर्त यह है कि नगरों में मूलभूत सुविधाओं पर काम किया जाए और जनता की समस्या को सुनकर उनका निराकरण किया जाए। 

इसी क्रम में शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने नगर निकायों के अधीन सड़कों के रखरखाव और नई सड़कों का निर्माण कराने की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को देने का फैसला किया। अब तक यह कार्य नगर निकाय अपने बोर्ड फंड से करा रहे थे और ज्यादातर निकाय क्षेत्रों में फंड के अभाव में सड़कों का बुरा हाल है। इसी क्रम में शहरों में पानी का कनेक्शन समस्त वर्गों को 100 रुपये में देने की सैद्धांतिक सहमति भी दे दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व की तरह सरकार एक रुपये में पानी का कनेक्शन देगी। 

शहरों की समस्याओं को करीब से जानने व वहां चल रही निर्माण व अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी जुटाने के लिए शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत गुरूवार को खुद शहरी निकायों के पास पहुंचे। नगर निगम दून में उन्होंने दो चरणों में प्रदेश के सभी निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से वार्ता की। पहले चरण में आठ नगर निगम के महापौर जबकि दूसरे चरण में 86 नगर पालिका व नगर पंचायतों के अध्यक्षों के साथ बैठकर विचार-विमर्श किया। शहरी विकास मंत्री ने मंडलवार हर तीन माह में ऐसी बैठक करने के निर्देश दिए, जिसे अपर सचिव स्तर पर आयोजित किया जाएगा। 

इस दौरान देहरादून के महापौर सुनील उनियाल गामा, ऋषिकेश की महापौर अनीता ममगाईं, हरिद्वार की महापौर अनीता शर्मा, रुड़की के महापौर गौरव गोयल समेत रुद्रपुर, काशीपुर व हल्द्वानी के महापौर और सचिव शहरी विकास शैलेश बगोली, नगर आयुक्त देहरादून विनय शंकर पांडेय और निदेशक शहरी विकास विनोद कुमार सुमन मौजूद रहे।  कोटद्वार की महापौर हेमलता नेगी कोरोना संक्रमण के कारण आइसोलेट होने की वजह से बैठक में नहीं आ सकीं। 

सफाई के लिए सरकार देगी मदद

सभी शहरों के महापौर ने नए इलाकों में सफाई का मुद्दा उठाया। बताया कि राज्य सरकार ने नए इलाकों को शहर में शामिल तो कर लिया, लेकिन मूलभूत सुविधा देने को बजट नहीं दिया। बताया कि सफाई के लिए मोहल्ला स्वच्छता समिति रखी गई हैं और उनका बजट निगम बोर्ड से दिया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री ने इसके लिए राज्य वित्त आयोग से बजट उपलब्ध कराए जाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी। हालांकि, मंत्री ने कहा कि इसके लिए वित्त विभाग से मंजूरी भी जरूरी है, लिहाजा उनसे भी वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही विकास प्राधिकरणों को मिलने वाली विकास राशि में से पचीस फीसद राशि निकायों को देने पर भी मंत्री ने सैद्धांतिक मंजूरी दे मामला कैबिनेट बैठक में रखने की बात कही। 

फोकट में नहीं मिलेगा पानी, सभी शहरों में लगाए जाएंगे मीटर 

शहरी विकास मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि अब पानी मुफ्त में नहीं मिलेगा। भगत बोले कि कब तक फोकट में पानी देते रहेंगे, अब शुल्क का समय आ गया है। उन्होंने सचिव शहरी विकास को हर घर में नल और सभी घर में स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश देते हुए यह कार्य जल्द पूरा कराने को कहा। इसके साथ ही सुविधा दी गई है कि जब तक हर घर में पानी के लिए मीटर नहीं लगता, तब तक भवन कर की कुल धनराशि का बारह फीसद शुल्क पानी के लिए वसूला जाएगा। 

रुड़की में एडीबी ने किया बुरा हाल

बैठक में रुड़की के महापौर गौरव गोयल ने एडीबी पर शहर का बुरा हाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि गत पांच साल में एडीबी ने जो पाइप-लाइनें डाली हैं उनकी वजह से हर जगह सड़कों व गलियों को खोदाई कर छोड़ दिया गया। स्थिति यह है कि शहर में चलना मुश्किल हो चुका है। ऋषिकेश की महापौर अनीता ममगाई द्वारा बड़े प्रतिष्ठानों से कूड़ा उठान का शुल्क नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया। उन्होंने कहा कि एम्स अस्पताल पर हर माह 25 हजार रुपये कूड़ा उठान का शुल्क लगा हुआ है, जो मिलता नहीं। इस पर मंत्री ने अस्पताल प्रशासन के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। काशीपुर की महापौर ने अमृत योजना में महंगे पानी के कनेक्शन का मुद्दा उठाते हुए शुल्क कम करने की मांग की। 

पेयजल व सीवरेज नगर निकायों के अधीन करने की सहमति

शहरों में पेयजल व सीवरेज का कार्य जल संस्थान या अन्य संस्थाओं से लेकर नगर निकायों को देने की तैयारी चल रही है। बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा और सभी महापौर ने इसकी पैरवी भी की। महापौर ने कहा कि बड़े शहरों में पेयजल, परिवहन, सीवरेज, ऊर्जा जैसे विभाग नगर निकायों के अधीन हैं। इससे कार्य आसान होते हैं और आमजन को झंझट से मुक्ति भी मिलती है। शहरी विकास मंत्री ने पेयजल व सीवरेज का कार्य निकायों के अधीन देने पर सैद्धांतिक सहमति देते हुए इसे कैबिनेट बैठक में ले जाने की बात कही। 

निकायों को मिल सकती है भूमि

निकाय प्रमुखों ने निकाय क्षेत्र की खाली सरकारी भूमि का मालिकाना हक निकायों को देने की मांग की। प्रमुखों ने कहा कि इससे अतिक्रमण पर रोक लगाई जा सकती है। शहरी विकास मंत्री ने सचिव को निर्देश दिए कि शहरी निकायों की भूमि के संरक्षण और प्रबंधन समेत मुद्रीकरण के लिए जरूरी योजना बनाई जाए। जहां जरूरत लगे, वहां राजस्व की भूमि शहरी निकायों को देने की प्रक्रिया शुरू की जाए। 

मलिन बस्तियों के नियमितीकरण का बढ़ेगा समय

प्रदेश में मलिन बस्तियों के नियमितीकरण को लेकर फिलहाल समय लगता नजर आ रहा है। सरकार के पास नियमितीकरण को लेकर अक्टूबर तक का समय है और इसके बाद आचार-संहिता लग सकती है। ऐसे में शहरी विकास मंत्री ने कहा कि सरकार यह चाहती है कि बस्तियों को नियमित किया जाए, लेकिन इसकी प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसलिए समय अक्टूबर से आगे बढ़ाया जा सकता है। 

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