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    Forest Fire: उत्तराखंड में जंगलों की आग को लेकर आई अच्‍छी खबर, तीन साल में इस बार मिली राहत

    Updated: Sat, 10 May 2025 08:22 PM (IST)

    Uttarakhand Forest Fire उत्तराखंड में जंगलों के झुलसने को लेकर इस बार कुछ सुकून की स्थिति है। वर्ष 2020 से लेकर अब तक की घटनाओं पर ही गौर करें तो इन छह वर्षों में आग से 10458.95 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। लेकिन 10 मई तक के आंकड़ों की तस्वीर देखें तो इस मर्तबा जंगलों को आग से सबसे कम क्षति पहुंची है।

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    Uttarakhand Forest Fire: उत्तराखंड में तीन साल में इस बार सबसे कम झुलसे जंगल. File Photo

    राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून। Uttarakhand Forest Fire: पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में जंगलों के झुलसने को लेकर इस बार कुछ सुकून की स्थिति है। आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं।

    पिछले तीन वर्षों में अग्निकाल (15 फरवरी से मानसून आने तक की अवधि) प्रारंभ होने से लेकर 10 मई तक के आंकड़ों की तस्वीर देखें तो इस मर्तबा जंगलों को आग से सबसे कम क्षति पहुंची है। इसे अग्नि नियंत्रण में जनसहभागिता पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही तकनीकी के उपयोग को लेकर उठाए गए कदमों की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। यद्यपि, मौसम भी अभी तक निरंतर साथ दे रहा है।

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    छह वर्षों में 10458.95 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान

    71.05 प्रतिशत वन भूभाग वाले उत्तराखंड के जंगल आक्सीजन का विपुल भंडार हैं, लेकिन हर साल ही इन्हें आग से क्षति पहुंच रही है। वर्ष 2020 से लेकर अब तक की घटनाओं पर ही गौर करें तो इन छह वर्षों में आग से 10458.95 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। इस दृष्टि से देखें तो हर साल औसतन 1743.16 हेक्टेयर जंगल को क्षति पहुंच रही है। यद्यपि, पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार अब तक आग की घटनाएं काफी कम हैं।

    विभागीय आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो इस बार 15 फरवरी को अग्निकाल प्रारंभ होने से लेकर अब तक वनों में आग की 184 घटनाएं हुई, जिनमें 210.79 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। पिछले तीन वर्षों में इस अवधि में वनों में आग की घटनाओं व क्षति के लिहाज से यह सबसे कम है। इससे पहले वर्ष 2024 में इसी अवधि में वनों में आग की 1040 घटनाओं में 1420.54 हेक्टेयर और वर्ष 2023 में 296 घटनाओं में 353.81 हेक्टेयर जंगल झुलसा था।

    असल में अग्निकाल प्रारंभ होने से पहले ही सरकार ने इस बार वनों में अग्नि नियंत्रण में जनसहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। इसके तहत अति संवेदनशील श्रेणी में शामिल चीड़ बहुल क्षेत्रों में ग्राम वनाग्नि प्रबंधन समितियां गठित की गईं और इन्हें प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया।

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    साथ ही अग्नि नियंत्रण के लिए फारेस्ट फायर एप समेत अन्य तकनीकी कदम भी उठाए गए, ताकि अग्नि दुर्घटना की सूचना तत्काल मिलते ही आग पर काबू पाने में वन कर्मी जुट सकें। इसके बेहतर परिणाम आए हैं। यही नहीं, इस बार नियमित अंतराल में हो रही वर्षा ने भी वनों में अग्नि नियंत्रण में प्रमुख भूमिका निभाई है।

    छह साल में जंगल की आग

    3425.05

    वर्ष प्रभावित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
    2025 (अब तक) 210.79
    2024 1773
    2023 933.55
    2022 3425.05
    2021 3943.89
    2020 172.69

    अग्निकाल शुरू होने से पहले इस बार जनजागरूकता अभियान वृहद स्तर पर चलाया गया। सामुदायिक संस्थाओं को भी साथ लिया गया। ग्राम वनाग्नि प्रबंधन समितियों के लिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की गई। आग की घटनाओं की सूचना तुरंत मिले, इसके लिए तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। मानीटरिंग ठीक से हो रही है और मौसम भी साथ दे रहा है। - निशांत वर्मा, अपर प्रमुख वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन।