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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 13, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Uttarakhand Forest Department: कौन बनेगा नया हॉफ, सरकार पर टिकी नजरें

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Sun, 13 Dec 2020 02:47 PM (IST)

वन विभाग का नया मुखिया (हेड आफ फॉरेस्ट फोर्स) कौन होगा इसे लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बाद तस्वीर ...और पढ़ें

Uttarakhand Forest Department: कौन बनेगा नया हॉफ, सरकार पर टिकी नजरें।
Uttarakhand Forest Department: कौन बनेगा नया हॉफ, सरकार पर टिकी नजरें।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में वन विभाग का नया मुखिया (हेड आफ फॉरेस्ट फोर्स) कौन होगा, इसे लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। 24 दिसंबर को विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक होगी, जिसमें हॉफ पद के लिए संस्तुति होगी। इसकी दौड़ में चार वरिष्ठ आइएफएस शामिल हैं। ऐेसे में सरकार पर नजरें टिकी हैं कि वह किसे विभाग के नए मुखिया का ताज पहनाती है।

वन विभाग की मौजूदा मुखिया रंजना काला 30 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रही हैं। उन्होंने 31 अक्टूबर को यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब नए मुखिया के लिए कसरत शुरू की गई है। इसके लिए 1986 बैच के आइएफएस राजीव भरतरी, 1987 बैच के विनोद कुमार सिंघल, अनूप मलिक व ज्योत्सना शितलिंग दौड़ में हैं। भरतरी वर्तमान में जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि सिंघल के पास प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव के साथ वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक का चार्ज है। मलिक जायका परियोजना का दायित्व संभाले हुए हैं, जबकि शितलिंग के पास वन पंचायतों का दायित्व है।

शासन स्तर से भी विभाग के नए मुखिया के लिए कवायद शुरू की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि 21 से 23 दिसंबर तक विधानसभा का शीतकालीन सत्र है। इसे देखते हुए सत्र समाप्त होने के बाद 24 दिसंबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डीपीसी की बैठक होगी, जिसमें हॉफ के पद के लिए उक्त चारों आइएफएस के नाम पर विचार होगा। समिति अपनी संस्तुति करने के बाद इसे सरकार को भेजेगी। इसके बाद मुख्यमंत्री और वन मंत्री तय करेंगे कि नया हॉफ किसे बनाना है। हॉफ के चयन में केंद्र सरकार की वर्ष 2009 की गाइडलाइन को ध्यान में रखा जाएगा। इसमें वरिष्ठता, योग्यता व कार्यकुशलता के आधार पर सरकार हॉफ का चयन कर सकती है। ऐसे में निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हैं।

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