राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण की बढ़ती घातकता को देखते हुए अब इसकी जांच के साथ ही दवा का किट देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मकसद यह कि यदि संक्रमित व्यक्ति समय से इलाज शुरू कर देंगे तो इससे बीमारी पर काबू पाने में सहायता मिल सकेगी। 

प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही मरने वालों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके कारणों का जब अध्ययन किया गया तो यह बात सामने आई कि कोरोना जांच को लेकर अभी भी थोड़ी लापरवाही बरती जा रही है, जिसमें लक्षण भी आए उन्होंने शुरुआत में खुद ही दवा खानी शुरू कर दी। जब लगातार बुखार नहीं टूटा या फिर आक्सीजन लेवल नीचे आने लगा, तब कहीं जाकर जांच कराई गई। कई मामलों में यही देरी जानलेवा साबित हुई। 

यह बात भी सामने आई कि कोरोना संक्रमण के बढ़ने के साथ ही जांच भी तेजी से बढ़ रही है। इससे जांच केंद्रों में दबाव बढ़ा और जांच रिपोर्ट आने में अब दो से तीन दिन तक का समय बीत जा रहा है। रिपोर्ट आने तक मरीज कोरोना संक्रमण की दवा शुरू नहीं कर रहे हैं। इससे रिपोर्ट आने तक कई बार मरीज की हालत गंभीर हो जा रही है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी जांच केंद्रों पर दवा भी उपलब्ध करने के निर्देश दिए हैं। 

सचिव स्वास्थ्य डा. पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि अब सभी सरकारी जांच केंद्रों पर दवा की किट उपलब्ध रहेगी। मरीज जांच के बाद ये दवा अपने साथ ले जाकर इसे लेना शुरू कर सकते हैं। इसमें स्टेरायड को छोड़ शेष दवा उसी दिन से शुरू की जा सकती है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। यदि कोई तकलीफ होती है तो डाक्टर से सलाह लेने के बाद स्टेरायड ली जा सकती है। 

निजी अस्पतालों को भी दी जा रही मुफ्त ट्रेनिंग

सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि इस बार प्रदेश में कई निजी अस्पतालों ने बढ़ते संक्रमण को देखते हुए खुद को कोविड केयर अस्पतालों में परिवर्तित किया है। यह एक अच्छा कदम है। स्वास्थ्य विभाग इन सभी अस्पतालों से संपर्क में हैं। इनके चिकित्सकों को मुफ्त में कोरोना के इलाज संबंधी ट्रेनिंग दी जा रही है। यहां तक कि किसी केस विशेष के संबंध में निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को कोई जानकारी लेनी होती है तो उसकी भी सुविधा दी गई है।

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