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    उत्तराखंड भाजपा का चिंतन शिविर 12 मार्च से दून में, विधानसभा चुनाव की रणनीति पर होगा मंथन

    By Raksha PanthriEdited By:
    Updated: Wed, 24 Feb 2021 11:30 AM (IST)

    उत्तराखंड भाजपा का दो दिवसीय चिंतन शिविर अब 12 मार्च से देहरादून में आयोजित किया गया है। शिविर में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने उक्त जानकारी दी।

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    उत्तराखंड भाजपा का चिंतन शिविर 12 मार्च से दून में।

    राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड भाजपा का दो दिवसीय चिंतन शिविर अब 12 मार्च से देहरादून में आयोजित किया गया है। शिविर में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने उक्त जानकारी दी। पहले यह चिंतन शिविर 19 फरवरी से मार्चूला में प्रस्तावित था, लेकिन तब चमोली में आई आपदा के कारण पार्टी के केंद्रीय व प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशों पर इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह शिविर 12 व 13 मार्च को देहरादून में होगा, जिसमें पार्टी के केंद्रीय नेता भी शिरकत करेंगे। चौहान ने यह भी जानकारी दी कि देहरादून में 13 मार्च से भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक भी होगी, जो 14 मार्च तक चलेगी।

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    डा मुकुल सती के पास एडी पदभार यथावत

    शासन ने डा मुकुल कुमार सती को सौंपे गए अतिरिक्त प्रभार हटा लिए हैं। वह समग्र शिक्षा अभियान में बतौर प्रभारी अपर निदेशक पद पर यथावत रहेंगे। उनके शेष पदभार कुमाऊं मंडल में माध्यमिक शिक्षा अपर निदेशक और डायट भीमताल के प्राचार्य हटाए गए हैं। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

    अभिहित अधिकारी और अपीलीय अधिकारी की तैनाती को मंजूरी

    राज्यपाल ने चमोली में आई आपदा में लापता व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अभिहित और अपीलीय अधिकारियों की तैनाती को अनुमति प्रदान कर दी है। इसके अनुसार लापता व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सभी जिलों के उप जिलाधिकारी अभिहित अधिकारी होंगे। मृत्यु प्रमाण पत्र के दावों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए सभी जिलों के जिलाधिकारी अपीलीय अधिकारी होंगे। 

    शासन ने बीते रोज ही लापता व्यक्तियों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने को प्रक्रिया निर्धारित की है। इसके लिए लापता व्यक्तियों को तीन श्रेणी में बांटा किया गया है। पहली श्रेणी में आपदा प्रभावित स्थान के स्थायी निवासी, दूसरी श्रेणी में उत्तराखंड के अन्य जिलों के निवासी और तीसरी श्रेणी में अन्य राज्यों के पर्यटक व ऐसे व्यक्तियों को रखा गया है, जो आपदा के समय आपदा प्रभावित स्थान पर उपस्थित थे।

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