ऋषिकेश, जेएनएन। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा ने शुरुआती दौर में खासी तेजी पकड़ ली है। साल 2013 की आपदा के बाद पहली बार चारधाम यात्रा अपने पहले सप्ताह में ही नए कीर्तिमान की ओर बढ़ी है। एक सप्ताह में चारधाम यात्रियों की संख्या 88 हजार को पार कर चुकी है। जबकि इससे पहले शुरुआती सप्ताह में कभी भी इतनी संख्या में यात्री चारधाम यात्रा पर नहीं पहुंचे हैं। 

चारधाम यात्रा उत्तराखंड की सबसे बड़ी तीर्थयात्रा के साथ हजारों लोगों की आजीविका और प्रदेश के राजस्व का भी बड़ा स्त्रोत है। वर्ष 2013 में केदार घाटी में आयी आपदा के बाद चारधाम यात्रा पूरी तरह से ठप हो गई थी। वर्ष 2014 में तो आपदा का भय श्रद्धालुओं में इस कदर रहा कि पूरे यात्राकाल में ही अपेक्षा से बेहद कम यात्री चारधाम यात्रा पर पहुंचे। साल 2015 में जाकर चारधाम यात्रा की खामोशी टूटी और इसके साथ ही चारधाम यात्रा पर निर्भर परिवहन और अन्य व्यवसायियों को भी कुछ राहत मिली। 

पिछले तीन वर्षों से चारधाम यात्रा कुछ पटरी पर लौटी है। आपदा के बाद यह पहला वर्ष है, जब शुरुआत में ही चारधाम यात्रा ने अच्छी गति पकड़ ली है। अक्षय तृतीया पर सात मई को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं की संख्या में बढोत्तरी होने लगी है। अब जबकि दो धामों के कपाट खुले एक सप्ताह का समय बीता है, चारधाम यात्रियों की संख्या 88 हजार के आंकड़े को पार गई है। 

पिछले वर्षों की बात करें तो वर्ष 2013 की आपदा के बाद वर्ष 2014 में दो मई को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुले थे। इसके एक सप्ताह बाद तक महज 9037 यात्री ही धामों के दर्शन को गए थे। वर्ष 2015 में 21 अप्रैल को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद यह आंकड़ा 14 हजार 541 था। वर्ष 2016 में नौ मई को गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद 80 हजार 923 यात्री धामों को रवाना हो चुके थे। वहीं वर्ष 2017 में 28 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद 42 हजार 457 यात्री जबकि गत वर्ष यानी 2018 में 18 अप्रैल को गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद यह संख्या महज सात हजार 706 थी। 

वर्ष 2018 में गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट 18 अप्रैल को खुल गए थे। जबकि केदानाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल व बदरीनाथ के कपाट 30 अप्रैल को खुले थे। यही वजह रही कि चारों धामों के कपाट खुलने के बीच करीब ग्यारह दिन का अंतर होने की वजह से वर्ष 2018 में शुरूआती सप्ताह में यात्रा बेहद धीमी रही। जबकि इस वर्ष सात मई को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद नौ मई को केदारनाथ व 10 मई को बदरीनाथ के कपाट खुले हैं, जिससे शुरुआती दौर में यात्रा ने खासी गति पकड़ ली है। इस एक सप्ताह में ही चारधाम यात्रियों की संख्या 88 हजार 692 तक पहुंच गई है, जो एक नया रिकॉर्ड है। प्रथम सप्ताह में चारधाम यात्रा की स्थिति 

वर्ष          यात्रियों की संख्या 

2014       9037 

2015      14541 

2016      80923 

2017     42457 

2018     7706 

2019     88692 

स्त्रोत: त्रिलोक सेक्योरिटी सिस्टम प्रा. लि. ऋषिकेश। 

चारधाम यात्रा में शुरूआती दस दिनों में बसों की स्थिति 

वर्ष,       बसों की संख्या,  यात्रियों की संख्या 

2017  734      22173 

2018  440      13345 

2019  860      25734 

स्त्रोत: संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति, ऋषिकेश। 

117 बसों से यात्री गए धामों के दर्शन को 

मंगलवार को संयुक्त रोटेशन की 117 बसों से 3515 यात्री विभिन्न धामों के लिए रवाना हुए। हालांकि सोमवार की तुलना में यह संख्या कम है। संयुक्त रोटेशन ने चारधाम यात्रा के लिए पांच मई से बसों को धामों के लिए भेजना शुरू कर दिया था। इस तरह अब तक दस दिनों में संयुक्त रोटेशन की कुल 860 बसों से 25734 यात्री विभिन्न धामों को रवाना हो चुके हैं। बुधवार के लिए भी संयुक्त रोटेशन के पास एक सौ से अधिक बसों की एडवांस बुकिंग है। 

संयुक्त रोटेशन के प्रशासनिक अधिकारी बृजभानु प्रकाश गिरी ने बताया कि अब तक संयुक्त रोटेशन की यात्रा बेड़े की आधी से अधिक बसें धामों को रवाना हो चुकी हैं। जो बसें शुरुआत में दो धामों को गयी थी, वह वापस लौट चुकी हैं। जबकि चारधामों को गयी बसें भी वापस लौटने लगेंगी।

स्क्रीन पर मौसम अपडेट अभी भी नहीं 

चारधाम यात्रा में मौसम के मिजाज से यात्रियों को अपडेट कराने के लिए मंडलायुक्त ने प्रशासन को चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड पर डिजिटल स्क्रीन पर मौसम का अपडेट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। मगर, चारधाम यात्रा को एक सप्ताह से अधिक का समय पूरा हो गया और अभी तक यहां मौसम का कोई अपडेट यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है। यहां स्थापित किए गए चारधाम यात्रा सहायता केंद्र के बाहर स्क्रीन तो लगी है, मगर इस पर अभी तक मौसम की कोई सूचना प्रसारित नहीं की जा रही है। जिससे यात्रियों को धामों में मौसम की जानकारी ही नहीं मिल पा रही है।

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