देहरादून, जेएनएन। डॉ. एनएस खत्री (डिप्टी एमएस दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय) का कहना है कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिस कारण जनता में डर बना हुआ है। कई लोग लक्षण होने के बाद भी कोरोना की जांच कराने नहीं जा रहे हैं। वह निजी तौर पर इलाज कर समस्या खड़ी कर रहे हैं। इस तरह से वह न सिर्फ खुद को बल्कि परिवार और समाज को भी मुश्किल में डाल रहे हैं। देर होगी तो किसी भी उम्र के शख्स को दिक्कत हो सकती है।

यदि कोरोना से जुड़े किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल ही जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह मानें। कोरोना से जुड़े कई डर हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। कई लोग इसलिए भी जांच से बच रहे हैं कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कर दिया जाएगा। कई इसलिए डरते हैं कि पॉजिटिव आए तो स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पहुंच जाएगी। यदि टीम आई तो आस-पड़ोस के लोग क्या सोचेंगे। यह सब बातें दिमाग से निकाल दीजिए। सरकार ने अब होम आइसोलेशन की भी सहूलियत दे दी है। जिसमें मरीज का घर रहकर भी इलाज हो सकता है। 

बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए कोविड-केयर सेंटर में भी अच्छी सुविधाएं हैं। लोग क्या सोचेंगे यह भी भूल जाइए, क्योंकि बीमारी किसी को भी हो सकती है और दूसरों के नजरिये से ज्यादा जरूरी है अपना और परिवार का स्वास्थ्य। इसलिए समय पर बीमारी का पता चलना जरूरी है।

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मेरी सभी से यह भी अपील है कि आपके आसपास कोई व्यक्ति पॉजिटिव आता भी है, तो अघोषित सामाजिक बहिष्कार की जगह उसका मनोबल बढ़ाएं। जिससे उसे इस समस्या से बाहर आने में मदद मिलेगी। एक बात और। एसिम्टोमैटिक मरीजों में भले ही कोविड-19 के लक्षण स्पष्ट तौर पर न दिखाई दें, पर वायरल लोड तो शरीर में है ही। ऐसे में होम आइसोलेशन के दौरान डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा को नियमित रूप से लेते रहें। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही न करें। अन्यथा दिक्कत हो सकती है। अगर आप किसी अन्य बीमारी की दवा लेते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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