देहरादून, जेएनएन। डॉ. विवेक कुमार वर्मा (वरिष्ठ छाती एवं श्वास रोग विशेषज्ञ, वेलमेड हॉस्पिटल) का कहना है कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमण के कारण इनफ्लेमेशन हो जाने से फेफड़े खून में ऑक्सीजन पहुंचाने में असमर्थ हो जाते हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट आने लगती है। इन हालात में ज्यादातर मरीजों की स्थिति तो सामान्य रहती है, लेकिन कुछ गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। कभी-कभी मरीज को ऑक्सीजन का स्तर कम होने का आभास भी नहीं हो पाता। इसे हैप्पी हाइपोक्सिया कहते हैं, जिसका परिणाम घातक होता है। 

ऐसे में अपने ऑक्सीजन लेवल के प्रति सतर्क रहें। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर ऑक्सीमीटर से पता किया जा सकता है। पल्स ऑक्सीमीटर बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर इसकी सहायता से ऑक्सीजन सैचुरेशन को नियमित नापना चाहिए और ऑक्सीजन का स्तर कम होने की दशा में तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। 

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आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल 95 से 100 फीसद के बीच रहता है। सांस संबंधी पुरानी बीमारियों जैसे कि सीओपीडी में यह स्तर कम हो सकता है। कोरोना के कारण जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें यह स्तर 80 फीसद से नीचे पहुंच जाता है। कोरोना संक्रमण के कारण रक्त का थक्का भी बन सकता है। इससे भी खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और हार्ट अटैक पड़ सकता है। निमोनिया और किडनी से संबंधित बीमारी में भी ऑक्सीजन का स्तर गिरता है। इस समय बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी को कोविड-19 प्रोटोकॉल के लिहाज से देखें।

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