राज्य ब्यूरो, देहरादून। शासन ने भंडारण और स्क्रैप नीति के बाद अब स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट और हाट मिक्स प्लांट को अनुमति देने के लिए नई नीति जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि हरिद्वार में स्टोन क्रशर गंगा नदी से एक किमी की दूरी और अन्य मैदानी जिलों की नदियों से 500 मीटर की दूरी पर खोले जा सकेंगे। पहले इन्हें हरिद्वार में गंगा नदी से 1.5 किमी और अन्य मैदानी जिलों की नदियों से एक किमी दूर खोलने की अनुमति थी। इसमें यह भी कहा गया है कि आबादी से 300 मीटर की दूरी पर स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट खोलने की स्थिति में यहां स्थित परिवार अथवा भूस्वामियों की अनापत्ति जरूरी होगी।

गुरुवार को सचिव उद्योग (खनन) आर मीनाक्षी सुंदरम ने उत्तराखंड स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, मोबाइल स्क्रीनिंग प्लांट, पल्वराईजर प्लांट, हाट मिक्स प्लांट, रेडिमिक्स प्लांट अनुज्ञा नीति 2021 जारी की। इस नीति के अनुसार स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट की स्थापना बरसाती नदी से 50 मीटर, सार्वजनिक धार्मिक स्थल, स्कूल, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, नर्सिंग व आबादी से 300 मीटर की दूरी पर की जाएगी। पहले यह दूरी 500 मीटर थी। स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट के लिए लाइसेंस 10 साल के लिए दिया जाएगा। विशेष यह कि उपखनिज के छोट लाट में खनन क्षेत्र में स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट लगाया जा सकेगा और इसमें नदी से दूरी के मानक में छूट रहेगी। हालांकि इनके लिए स्वीकृति एक वर्ष के लिए दी जाएगी। हाट मिक्स व रेडिमिक्स प्लांट के लिए यह अनुमति दो वर्ष और पल्वराईजर प्लांट के लिए यह अनुमति पांच साल के लिए दी जाएगी।

नीति में इनके लिए शुल्क भी तय किया गया है। पर्वतीय क्षेत्र में स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट के लिए 100 टन प्रतिघंटा के लिए लाइसेंस शुल्क 10 लाख और मैदानी जिलों के लिए लाइसेंस शुल्क 20 लाख रखा गया है। वहीं, स्क्रीनिंग प्लांट के लिए पर्वतीय क्षेत्र में लाइसेंस शुल्क दो लाख और मैदानी क्षेत्र में लाइसेंस शुल्क चार लाख रुपये रखा गया है।

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Edited By: Raksha Panthri