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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बंगला गिफ्ट मिलते ही माता-पिता को निकाला, पोते-पोती से भी किया दूर; डीएम के पास पहुंचा मामला तो लिया एक्‍शन

Published: Wed, 02 Jul 2025 07:07 PM (IST)

देहरादून में एक बुजुर्ग दंपती को उनके बेटे ने धोखा देकर उनका बंगला हड़प लिया और उन्हें बेघर कर दिया। ...और पढ़ें

थक हारकर जिलाधिकारी के पास पहुंचे बुजुर्ग सिख दंपती। File Photo
थक हारकर जिलाधिकारी के पास पहुंचे बुजुर्ग सिख दंपती। File Photo

HighLights

  1. बेटे ने माता-पिता से हड़पा बंगला
  2. जिलाधिकारी ने गिफ्ट डीड की रद्द
  3. बुजुर्ग दंपती को मिला त्वरित न्याय

जागरण संवाददाता, देहरादून। बिजनेस के नाम पर बेटे ने बुजुर्ग माता-पिता से बंगले की अपने नाम पर गिफ्ट डीड करवा ली। जब संपत्ति पर अधिकार मिला तो बेटे ने माता-पिता को संपत्ति से बेदखल कर दर-दर भटकने को विवश कर दिया। यहां तक कि पोते पोती से मिलने पर भी पाबंदी लगा दी गई। दिल को झकझोरने वाली यह कहानी विकासनगर के बुजुर्ग दंपती परमजीत सिंह और अमरजीत कौर की है।

अपने ही बेटे गुरविंदर सिंह के हाथों खून पसीने से जोड़ी गई संपत्ति हड़प लिए जाने के बाद बुजुर्ग दंपती पुलिस से लेकर तहसील और अवर न्यायालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन न्याय नहीं मिला। हालांकि, असहाय व्यक्तियों की मदद को हर समय तत्पर रहने वाले जिलाधिकारी सविन बंसल के सम्मुख जब यह मामला आया तो उन्होंने एक झटके में गिफ्ट डीड को निरस्त कर बुजुर्ग दंपती को उनकी संपत्ति वापस दिला दी।

जिलाधिकारी सविन बंसल के अनुसार परमजीत ने अपने बेटे को 3080 वर्गफीट की संपत्ति (दो बड़े हाल शामिल) गिफ्ट कर दी थी। गिफ्ट डीड की शर्तों के अनुसार गुरविंदर सिंह माता पिता को भरणपोषण के अधिकार से वंचित नहीं करेगा और दादा दादी को पोते पोती से दूर नहीं करेगा।

बावजूद इसके गिफ्ट डीड की शर्तों का हर तरह से उल्लंघन किया गया। बुजुर्ग दंपती को न्याय दिलाने के लिए जिलाधिकारी कोर्ट में उचित सुनवाई की गई और सार्वजनिक सूचना के माध्यम से आपत्ति मांगी गई। जिसके क्रम में गिफ्ट डीड को निरस्त करने के साथ ही संपत्ति पर वापस परमजीत सिंह और उनकी पत्नी अमरजीत कौर को कब्जा दिलाया गया।

अपनी संपत्ति वापस पाकर बुजुर्ग दंपती के आंसू छलक पड़े। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि वह अपनी संपत्ति की आस ही छोड़ बैठे थे। उम्र के इस पड़ाव पर उनकी सभी उम्मीद धुंधली पड़ गई थी।