देहरादून, सुमन सेमवाल। दिल्ली-देहरादून राजमार्ग के चौड़ीकरण में शिवालिक वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। यहां गणोशपुर से मोहंड के बीच जिस चार किलोमीटर हिस्से पर वन्यजीवों की ज्यादा आवाजाही रहती हैं, वहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने एलीवेटेड रोड के सुझाव को नजरंदाज कर दिया है। इस अनदेखी पर शिवालिक वन प्रभाग ने आपत्ति जताते हुए एनएचएआइ को परियोजना के एलाइनमेंट में जरूरी बदलाव करने के लिए कहा है।

सहारनपुर से देहरादून के बीच शिवालिक वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व का क्षेत्र आपस में जुड़ा है। इस भाग पर अक्सर वन्यजीव वाहन दुर्घटना में मारे जाते हैं। यही वजह है कि राजमार्ग चौड़ीकरण की परियोजना में एलीवेटेड रोड को भी शामिल किया गया, जिससे वन क्षेत्र में वन्यजीव स्वछंद विचरण कर सकें। इसको लेकर 30 जून 2020 को भारतीय वन्यजीव संस्थान, एनएचएआइ, शिवालिक वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों ने संयुक्त सर्वे किया था। जिसके बाद सुझाव दिया गया कि वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए सर्वाधिक वन क्षेत्र वाले 16 किलोमीटर भाग पर एलीवेटेड रोड बनाई जाए। कार्यदायी संस्था एनएचएआइ के देहरादून स्थित परियोजना निदेशक कार्यालय ने इस पर सहमति भी व्यक्त की थी। लेकिन, इसके बाद अचानक यह तय कर दिया गया कि गणोशपुर से मोहंड तक एलीवेटेड रोड बनाने की जगह पूर्व में प्रस्तावित योजना के तहत सिर्फ सड़क को चौड़ा किया जाएगा।

यह जानकारी शिवालिक वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आर. बालाचंद्रन को मिली तो उन्होंने इसे औचित्यहीन करार दे दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सड़क को चौड़ा करने पर 10 से 15 हजार पेड़ काटने पड़ेंगे और वन्यजीवों की सुरक्षा का सवाल अपनी जगह खड़ा रहेगा। लिहाजा, सुझाव के मुताबिक गणोशपुर स्थित बुढ्ढावन नर्सरी के पास से एलीवेटेड रोड को घुमाव देते हुए मोहंड नदी के साथ-साथ आगे बढ़ाया जाए। मोहंड में इसे पुरानी सड़क पर मिला दिया जाए। फिलहाल, इस पर एनएचएआइ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इसलिए दिया एलीवेटेड रोड का सुझाव

गणोशपुर से मोहंड तक हाथी, चीतल, सांभर, तेंदुआ, नील गाय, जंगली सुअर, बार्किंग डियर, रेड जंगल फाउल, पीफाउड समेत तमाम वन्यजीवों की आवाजाही रहती है। ये वन्यजीव बिना किसी भय के विचरण कर सकें, इसीलिए एलीवेटेड रोड का सुझाव दिया गया। गणोशपुर से पहले के 12 किलोमीटर भाग पर यह सुझाव माना भी गया है।

मोहंड से डाटकाली मंदिर तक बदलाव नहीं

मोहंड से डाटकाली मंदिर के बीच करीब 850 मीटर हिस्सा वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। हालांकि, इस हिस्से पर एलीवेटेड रोड पहले की तरह प्रस्तावित है।

डाटकाली मंदिर से देहरादून तक भी बदलाव नहीं

इस क्षेत्र के 200 मीटर भाग को संवेदनशील माना गया है। यहां दो एनिमल अंडरपास प्रस्तावित हैं। इस भाग में भी किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया।

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डॉ. धनंजय, निदेशक (भारतीय वन्यजीव संस्थान) का कहना है कि हमारे विशेषज्ञों ने वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कर दिया था कि किस-किस भाग को एलीवेटेड रोड से कवर किया जाना है। इसको ध्यान में रखकर निर्माण किया जाए तो मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने की दिशा में यह बड़ा कदम होगा।

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