देहरादून, जेएनएन। वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड (वन आरक्षी) की भर्ती परीक्षा में संगठित तरीके से नकल कराई गई थी। रुड़की के एक कोचिंग सेंटर ने कुछ अभ्यर्थियों को डिवाइस देकर पेपर देने के लिए भेजा था। बाहर से कोचिंग सेंटर से जुड़े लोगों ने अभ्यर्थियों को सवालों के जवाब बताए थे। इस मामले में एसटीएफ ने रुड़की और पौड़ी में मुकदमे दर्ज कराए हैं। 

एसटीएफ की डीआइजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि स्पेशल टास्क को सूचना मिली थी कि बीते रविवार को हुई फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा में इलेक्ट्रानिक डिवाइस के जरिये नकल कराई गई। साथ ही पता चला कि इसके लिए अभ्यर्थियों से पांच से आठ लाख रुपये तक लिए गए हैं। इस पर टीम को मामले की जांच में लगाया गया। जांच के दौरान एसटीएफ ने जब रुड़की में पूछताछ की तो पता चला कि ओजस्व कॅरियर कोचिंग सेंटर के संचालक मुकेश सैनी ने परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को मोबाइल फोन और इलेक्ट्रानिक डिवाइस के जरिये प्रश्नों के उत्तर बताए।

बताया कि अभ्यर्थियों को पहले से ही इलेक्ट्रानिक डिवाइस लेकर परीक्षा केंद्र में भेजा गया था। जैसे ही प्रश्नपत्र सामने आया, अभ्यर्थियों ने सवाल बताने शुरू किए और दूसरी तरफ से उन्हें उत्तर बताए गए। आरोप है कि इस काम के लिए आरोपितों ने अभ्यर्थियों से पांच से आठ लाख रुपये तक वसूले। इस मामले में एसटीएफ की ओर से आरोपित कोचिंग संचालक मुकेश सैनी के खिलाफ रुड़की और पौड़ी में मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।

रुड़की और पौड़ी में हुई थी नकल

डीआइजी ने बताया कि जांच के दौरान रुड़की और पौड़ी में डिवाइस से नकल कराने की बात सामने आई है। कुछ छात्रों ने पूछताछ में माना है कि वह डिवाइस लेकर परीक्षा केंद्र में गए थे। बाहर से उन्हें मदद की गई।

मुकेश सैनी के खिलाफ पहले से दर्ज हैं मुकदमे

डीआइजी ने बताया कि आरोपित मुकेश सैनी के खिलाफ पहले भी मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। आरोपित ने 2015-16 में इसी तरह नकल करवाई थी। तब उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उस समय वह जेल भी गया था। इसके बाद 2018 में हुई परीक्षा में भी आरोपित पर नकल करवाने का आरोप था। लेकिन साक्ष्य नहीं मिलने के कारण मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।

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188 केंद्रों पर हुई थी परीक्षा

रविवार को हुई फॉरेस्ट गार्ड भर्ती के लिए प्रदेश में 188 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। यहां करीब एक लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। परीक्षा के बाद शाम को ओआरएम शीट और प्रश्नपत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गए। बाद में इसकी जांच साइबर थाने को सौंपी गई। 

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Posted By: Sunil Negi

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