राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में शेष रह गईं 1809 राशन की दुकानों के डिजिटाइजेशन का काम पूरा करने में खाद्य विभाग को कामयाबी मिल गई है। कोरोना संक्रमण में तेजी देखते हुए बायोमीट्रिक व्यवस्था स्थगित करने की राशन विक्रेताओं की मांग से सरकार सहमत नहीं है। लिहाजा राशन की दुकानों में बायोमीट्रिक प्रणाली के माध्यम से ही उपभोक्ताओं को सस्ता खाद्यान्न उपलब्ध होगा। 

खाद्य विभाग का दावा है कि प्रदेश की सभी 9225 राशन की दुकानों को डिजिटाइज किया जा चुका है। दरअसल इस काम के लिए विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ी है। सभी राशन की दुकानों को कामन सर्विस सेंटर के तौर पर विकसित करने के लिए सरकार ने जिस कंपनी के साथ अनुबंध किया था, वह उस अनुबंध को पूरा नहीं कर सकी। दूरदराज क्षेत्रों की 1809 दुकानों को डिजिटाइज करने से उक्त कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए थे। बाद में राज्य सरकार ने यह काम केंद्र सरकार का उपक्रम ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट इंडिया लिमिटेड (बेसिल) को सौंपा। 

बेसिल को बीते अप्रैल माह तक शेष दुकानों को डिजिटाइज करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कंपनी अपना काम पूरा कर चुकी है। उक्त सभी दुकानों में बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू हो चुकी है। इसके मुताबिक सरकारी सस्ता खाद्यान्न उपभोक्ताओं को अब बायोमीट्रिक के माध्यम से खाद्यान्न वितरण होगा। हालांकि कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद राशन विक्रेताओं की ओर से बायोमीट्रिक व्यवस्था को स्थगित करने की पैरवी की जा रही है। खाद्य मंत्री बंशीधर भगत इस पैरवी को नामंजूर कर चुके हैं। 

दरअसल, राशन की सभी दुकानों में बायोमीट्रिक प्रणाली लागू करने को लेकर केंद्र सरकार का भी राज्य पर दबाव है। खाद्यान्न आपूर्ति और वितरण में पारदर्शिता का फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलना है। खाद्य विभाग के अपर सचिव प्रताप शाह ने कहा कि बेसिल अपना काम कर चुकी है। सभी राशन की दुकानें डिजिटाइज हो चुकी हैं। यदि कहीं नेटवर्क संबंधी दिक्कत है तो उसे भी दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

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