देहरादून, जेएनएन। राजकीय शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी भंग कर दी गई है। संघ के संविधान का हवाला देते हुए शिक्षा निदेशक ने इस बाबत आदेश जारी किए। निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यकारिणी के चुनाव के लिए अधिवेशन कोरोना वायरस से फैली महामारी की स्थिति सामान्य होने पर ही हो पाएगा।

बता दें कि राजकीय शिक्षक संघ में चल रही गुटबाजी के चलते संघ विवादों में चल रहा था। संघ में चल रहे अंतर कलह के चलते संघ के महामंत्री सोहन सिंह माझिला ने संघ को भंग करने और जल्द अधिवेशन आयोजित करने की शिफारिश की थी। 

शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने आधिकारिक पत्र जारी कर यह स्पष्ट किया कि पूर्व में परिषदीय परीक्षाओं समेत अन्य कारणों के चलते संघ के द्विवार्षकि चुनाव आयोजित नहीं हो सके। संघ द्वारा लिए गए एक शैक्षिक सत्र का विस्तार मार्च महीने में समाप्त तो हो गया है। ऐसे में वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल संघ के संविधान के अनुसार समाप्त हो चुका है। 

अब अग्रिम चुनाव होने पर नई कार्यकारिणी ही संघ का प्रतिनिधित्व करेगी। कोरोना वायरस के चलते फिलहाल इतने बड़े स्तर का अधिवेशन आयोजित करने की इजाजत देना संभव नहीं। साथ ही संघ के संविधान संशोधन की फाइल भी शासन में अटकी हुई है। संघ का अधिवेशन स्थिति सामान्य होने के बाद ही आयोजित करने की इजाजत दी जा सकेगी। 

उधर, राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष केके डिमरी ने कहा कि संघ को सूचना दिए बिना इतना बड़ा निर्णय लेना उचित नहीं। राजकीय शिक्षक संघ ने फरवरी महीने में ही अधिवेशन करवाने की अपील शिक्षा निदेशक से की थी। लेकिन विभिन्न कारणों के चलते उन्होंने उस वक्त चुनाव टाल दिए। 

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कहा कि 31 मार्च को पुराना शैक्षणिक सत्र समाप्त होने पर भी निदेशक स्तर से संघ को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई। अब अचानक वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त बता कर प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षक संगठन को नेतृत्व विहीन करना व्यवहारिक नहीं है। शिक्षा विभाग और राज्य सरकार से इस बाबत जल्द बातचीत की जाएगी।

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Posted By: Bhanu Prakash Sharma

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