देहरादून, जेएनएन। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने एक मरीज को नया जीवन दिया है। बस दुर्घटना में पेट पर लगी चोट के कारण मरीज को सामान्य प्रक्रिया से पेशाब नहीं हो पा रहा था। उसे एक साल से कृत्रिम नलकी से पेशाब करवाया जा रहा था। सर्जरी के बाद अब मरीज बिल्कुल ठीक है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। 

ग्राम तोगड़ा उत्तरकाशी निवासी विजय जोशी (45 वर्ष) को 18 नवम्बर 2018 को एक बस दुर्घटना में पेट में गहरी चोट लगी थी। 10 मार्च को इलाज के लिए वह श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल पहुंचे। यूरोलॉजिस्ट डॉ. विमल कुमार दीक्षित की देखरेख में पांच मई को उनका पहला ऑपरेशन किया गया। डॉ. दीक्षित ने बताया कि मरीज की पेशाब की नली का एक हिस्सा कूल्हे की हड्डी से कट गया था और यह हिस्सा दूर हो गया था। 

पेशाब की नस में खून का प्रवाह लगभग शून्य हो गया था। प्रथम चरण के ऑपरेशन में एनास्टमेटिक यूरेथ्रोप्लास्टी की गई। कुछ दिन तक पेशाब सामान्य प्रक्रिया में हुआ लेकिन कुछ दिनों के बाद फिर रुक गया। दोबारा जांच की गई तो डॉक्टरों ने पाया कि पेशाब की नस के बीच पेडू (कूल्हे) की हड्डी आ रही है। 5 सितम्बर को प्रोग्रेसिव पैरिनियल यूरेथ्रोप्लास्टी सर्जरी की गई। यह सर्जरी बेहद एडवांस और जटिल प्रक्रिया है।

इस सर्जरी के दौरान पेशाब की नली में रक्त प्रवाह को सुनिश्चित करते हुए पेडू की हड्डी के निचले हिस्से को काटकर पेशाब की नली के दो कटे हिस्सों को जोड़ा गया। यह सर्जरी केवल कुछ मेट्रो शहरों में ही उपलब्ध है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 3-4 दिन भर्ती रहने के बाद ही मरीज को छुट्टी मिल गई। अब वह सामान्य है। 

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Posted By: Raksha Panthari

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