देहरादून, जेएनएन। ऊर्जा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का झटका लग सकता है। अक्टूबर में बिजली की दरों में हुई 8.99 फीसद की अंतरिम वृद्धि के बाद एक बार फिर उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड विद्युत दरों में वृद्धि करने की तैयारी में है। प्रबंधन ने बोर्ड से मंजूरी के बाद बिजली की दरों में 7.70 फीसद बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को भेज दिया है। आयोग में सुनवाई के बाद दरें तय की जाएंगी।

ऊर्जा निगमों के कार्मिकों को रियायती दरों पर असीमित बिजली देने वाले यूपीसीएल ने आम उपभोक्ताओं की बिजली महंगी करने का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। इसमें बिजली के दामों में 7.70 फीसद बढ़ोत्तरी करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव के मुताबिक घरेलू उपभोक्ता के लिए बिजली महंगी हो सकती है। वर्तमान में घरेलू उपभोक्ता को अलग-अलग स्लैब के अनुसार से करीब तीन रुपये से छह रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है। अगर 7.70 फीसद की दर से विद्युत दर बढ़ी तो घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली के अधिक दाम चुकाने होंगे। इससे प्रदेश के 22 लाख से ज्यादा घरेलू उपभोक्ता प्रभावित होंगे।

यूपीसीएल ने दावा किया था कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में बिजली आपूर्ति करने में ही 441 करोड़ का घाटा हुआ था। इसके अलावा सूबे में 1,08,814 उपभोक्ताओं पर 700 करोड़ का बकाया है। ऐसे में यूपीसीएल एक हजार करोड़ से ज्यादा घाटे में चल रहा है। इस घाटे से उबरने के लिए बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। इधर, प्रस्ताव पर विद्युत नियामक आयोग जन सुनवाई करेगा। इसमें आम उपभोक्ता आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी की जाएगी। बिजली के नए दाम एक अप्रैल 2020 से लागू होंगे।

विद्युत नियामक आयोग के सचिव नीरज सती ने बताया कि प्रस्ताव पर जनवरी-फरवरी तक सुनवाई होगी। इस पर जनता की आपत्तियां भी सुनी जाएंगी। हाल ही में आयोग ने अंतरिम राहत के तौर पर यूपीसीएल को विद्युत दर बढ़ाने का प्रस्ताव पर मंजूरी दी थी। अब जो प्रस्ताव आएगा, उसमें अंतरिम राहत में दी गई वृद्धि पर भी विचार विमर्श किया जाएगा। फिर दाम बढ़ाने पर आयोग फैसला लेगा और एक अप्रैल से संशोधित दरें लागू होंगी।

इसी वर्ष अक्टूबर में बढ़े थे बिजली के दाम

विद्युत नियामक आयोग ने अंतरिम राहत के तौर यूपीसीएल को बिजली बढ़ाने की अनुमति दी थी। इसके बाद यूपीसीएल ने एक अक्टूबर से बिजली के दामों में 8.99 फीसद की वृद्धि की थी। छह माह में यह दूसरी बढ़ोत्तरी होगी।

साढ़े सात हजार करोड़ के एआरआर का प्रस्ताव भेजा

यूपीसीएल प्रबंधन ने विद्युत नियामक आयोग में वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 7,606 करोड़ के कुल राजस्व लागत का प्रस्ताव भेजा है। यह पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 544 करोड़ रुपये ज्यादा है। पिछले वित्तीय वर्ष में 7,062 करोड़ के एआरआर का बजट था।

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बोले अधिकारी

बीसीके मिश्र (प्रबंध निदेशक, पावर कारपोरेशन लिमिटेड) का कहना है कि बिजली की दरों में 7.70 वृद्धि का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को भेजा गया है। साथ ही इस बार कुल राजस्व लागत के 7,604 करोड़ का एआरआर भेजा गया है। प्रबंधन यूपीसीएल को घाटे से उबारने के लिए प्रयासरत है।

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Posted By: Sunil Negi

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